अवैध खनन से सरकार की छवि पर पलीता लगवाने में किसे है फायदा ?

अवैध खनन : आरबीएम है कि खत्म होने का नाम ही नहीं लेता

0
749

खुद तो अवैध खनन से काट रहे हैं चांदी और सरकार को अंधेरे में रख छवि को लगा रहे हैं बट्टा !

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : कोटद्वार में लगभग सभी नदियों में रिवर चेनेलाइजिंग की विज्ञप्ति आ गयी है। जो सरकार निश्चित ही सराहनीय निर्णय है। दरअसल जहाँ 2017 में कोटद्वार में आई जानलेवा आपदा के बाद रिवर चेनेलाइजिंग की आवश्यकता महसूस की गई ,वहीँ राजस्व के स्रोत के चलते भी रिवर चेनेलाइजिंग राजस्व का बेहतर स्रोत था। रिवर चेनेलाइजिंग की विज्ञप्ति के आने के बाद कोटद्वार की नदियों से उपखनिजों की बेधड़ेल्ले से चल रही चोरी पर भी रोकथाम लग सकेगी। अन्यथा  अभी खनन माफिया दिन दहाड़े बेखौफ नदियों में उपखनिजों की चोरी में लिप्त हैं। कोटद्वार की इन नदियों में पिछले जून जुलाई के बाद खनन  बन्द कर दिया गया था लेकिन अभी 2020 की फरवरी तक सैकड़ों डम्पर और ट्रक उपखनिजो के स्टॉकों से लगातार उत्तर प्रदेश में आरबीएम की ढुलाई कर रहे थे। लोग समझ ही नहीं पा रहे थे कि पिछले 6 महीनों से सैकड़ों ट्रक और डम्पर दिन और सारी रात कई चक्कर आरबीएम की ढुलाई कर रहे हैं? और इतना आरबीएम आ कहाँ से रहा है? द्रौपदी के चीर की तरह इन स्टॉकों का आरबीएम है कि खत्म होने का नाम ही नहीं लेता।सूत्रों के अनुसार वन विभाग के नाममात्र के पट्टों से नाममात्र के गिने चुने रवन्नो से,सैकड़ों ट्रक और डम्पर,कैसे रात और दिन कई चक्कर  आरबीएम ढो रहे हैं? जहां खनन की अनुमति नहीं है वहां भी दिन- दहाड़े, धड़ल्ले से नदीं में जेसीवी उतार कर अवैध खनन किया जा रहा था। यह सब प्रशासन पर दबाव बनाये बिना संभव नहीं था। और कुछ तंत्र में शामिल लोग तो बहती गंगा में ही हाथ धोते रहते हैं।

यह मात्र संयोग ही नहीं हो सकता कि अपनी सख्तायी के ही चलते 22 जनवरी को कौड़िया चैक पोस्ट पर परिवहन अधिकारी  हरीश सती द्वारा 4 डंपरों के चालान किये गये तो एक दो दिन बाद उन्हें पौड़ी भेजने के आदेश दे दिए गए। परिवहन अधिकारी हरीश सती द्वारा 6 महीने पहले अक्टूबर में भी ओवरलोडेड ट्रक और डंपरों पर सख्त एक्शन लिया गया था जिससे कौड़िया से नजीबाबाद की तरफ ओवरलोडेड ट्रकों का 10 किमी लंबा जाम 5 दिन तक लगा रहा। उसके बाद भी लगातार ट्रकों को ओवरलोडिंग के लिए कौड़िया RTO चैक पोस्ट द्वारा अनवरत चेकिंग द्वारा हतोत्साहित किया गया। अपने सहयोगी कार्मिकों की मदद से एक-एक डम्पर को कांटा करा कर अंडर लोडिंग सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया। इसी घटना के बाद प्रशासन द्वारा कोटद्वार में कई खनन सामग्री स्टॉकों पर छापे मारकर कार्रवाई भी की गयी । जिससे सबसे अधिक असहजता खनन सामग्री(आरबीएम) ढोने वाले डंपरों और स्टॉक वालों को थी। क्योंकि  RTO चैक पोस्ट द्वारा की गई कार्रवाई ने सारे प्रशासन का ध्यान उधर खींचा। लेकिन इतनी बड़ी घटना भी कोटद्वार के समाचार पत्रों में सुर्खियां नहीं बनने दी गयी। लेकिन देवभूमि मीडिया ने इसे प्रमुखता से कवर किया था। क्या यह संयोग ही है कि अब रिवर चेनेलाइजिंग की प्रक्रिया से पहले हरीश सती को कौड़िया चैकपोस्ट से पौड़ी चलता कर दिया गया। 

जाहिर है कि अवैध खनन करने वालों के हौसले अब बुलंद है। लेकिन अब लीगल तरीके से खनन होने से इस अवैध खनन पर अंकुश लगने के साथ राजस्व की प्राप्ति भी होगी। लेकिन डंपरों  द्वारा अत्यधिक ओवरलोडिंग की समस्या जस की तस बनी हुई है। ये अत्यधिक ओवरलोडेड डंपर असुरक्षित तरीके से चलते है।इनके चपेटे में कई लोग आ चुके है। ऊपर तक ठसाठस भरे और बिना ढके और धूल उड़ाते इन आरबीएम भरे डंपरों के ऊपर से पत्थर गिरने का डर बना रहता है।सड़क के आसपास के लोगों के घरों में आरबीएम की धूल भर जाती है।

इन ओवरलोडेड डम्पर और ट्रकों ने न केवल सड़कों पर बड़े बड़े गड्ढे कर दिये हैं अपितु कोटद्वार- नजीबाबाद- हरिद्वार के नहर वाले मार्ग के पुलों के लिए भी  खतरा पैदा कर दिया है। पुलों का लोहा तक साफ दिखने लगा है। लेकिन कोटद्वारा के इन खनन वालों की पहुंच के आगे सभी महकमें बेबस है और जो अधिकारी महज खानापूर्ति की कागजी कार्रवाई के बजाय इन्हें जनहित में लगातार सही ढंग से चलने की हिदायत दे और सख्त कार्रवाई करे तो अपनी हनक में उनके आकाओं को यह भी गँवारा नहीं।

इस तरह के खानापूर्ति के नकारात्मक माहौल में कोई दंड अधिकारी भी खनन के छत्ते में हाथ क्यों डालना चाहेगा? होना तो यह चाहिए था कि हरिद्वार की रवासन नदी में चल रहे खनन की ही तरह, नदी से ही अंडरलोड आरबीएम (उपखनिज) भरा जाता। जिसके लिए सरकार को साधुवाद दिया जाना चाहिए क्योंकि पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। इससे सभी को सहूलियत रहती। लेकिन एक तो कोटद्वार और ऊपर से अवैध खनन ऐसी अपेक्षा ज्यादती तो नहीं? क्या कोटद्वार देहरादून से इतना दूर है? आखिर सरकार की छवि में पलीता लगवाने में किसे फायदा हैं? जो खुद तो अवैध खनन से चांदी काट रहे हैं और सरकार को अंधेरे में रख सरकार की छवि को बट्टा लगा रहे हैं।