राजद्रोह के मामले को पुनः विवेचना के आदेश पुलिस को रिपोर्ट सौंपने के आदेश

कोर्ट ने किया जाँच अधिकारी को तलब

रांची (झारखंड ) : ख़बर रांची से आ रही है,राची की निचली अदालत में सब डिविजनल जुडिशल मजिस्ट्रेट द्वारा उमेश कुमार पर दर्ज राजद्रोह के मामले को पुनः विवेचना कर अदालत में पुलिस द्वारा रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं।  कोर्ट ने माना कि जाँच अधिकारी द्वारा राजद्रोह के मामले में उमेश कुमार को क्लीन चिट मिलना ग़लत था क्योंकि जाँच अधिकारी द्वारा ना तो ठीक से जाँच की गई और जाँच में ज़रूरी पहलुओं को नज़रअंदाज़ किया गया साथ ही साक्ष्यों पर काम नहीं किया गया।

कोर्ट ने जाँच अधिकारी को तलब करते हुए पूछा कि मोबाइल द्वारा जो भी बातचीत हुई है या वॉट्सऐप के ज़रिए बातचीत का जो भी साक्ष्य है उसे नज़रअंदाज़ क्यों किया गया सिर्फ़ CDR और नंबर की ओनरशिप तक ही मामला क्यों रखा गया? और केस से जुड़े ज़रूरी साक्ष्यों को केस डायरी का हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया।

इन तमाम बातों से ये प्रथम दृष्टा स्पष्ट होता है कि कहीं न कहीं पुलिस की मिलीभगत की वजह से उमेश कुमार पे दर्ज मुक़दमे को न सिर्फ़ हल्का किया गया बल्कि उसे बेबुनियाद क़रार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। इस मामले में पीड़ित ने कुछ दिन पूर्व ही कोर्ट के सामने गुहार लगायी थी जिसका संज्ञान अदालत ने लेते हुए सकती दिखाई और पुलिस को मामले की पुनः विवेचना के आदेश दिए।

कोर्ट के आगे दरख़ास्त दी गई कि जाँच अधिकारी ने आरोपी उमेश कुमार को बचाने के लिए केस डायरी में पूर्ण रूप से गड़बड़ की ताकि आरोपी को इसका पूरा फ़ायदा मिल सके।हालाँकि अब ये देखना दिलचस्प होगा कि राजद्रोह की जो धाराएँ पूर्व जाँच अधिकारी ने हटायी थी क्या वो धाराएँ पुनः विवेचना के बाद वापस उमेश कुमार पर लग सकती है? यदि ऐसा होता है तो उमेश कुमार की मुश्किलें यक़ीनन बढ़ जाएंगी।

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