गुस्साए ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे डीएफओ व रेंजर को बनाया मकान में बंधक

मृतकों के परिजनों को सात-सात लाख का मुआवजा व परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी के आश्वासन के बाद ही किया ग्रामीणों ने बंधक दोनों अफसरों को मुक्त

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

हरिद्वार।  शनिवार की शाम खेतों में फसल को रौंद रहे हाथियों को जंगल में खदेड़ते समय उसने महिला व किसान को पटककर मार डाला। गुस्साए ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे डीएफओ व रेंजर को एक मकान में बंधक बना लिया। ग्रामीणों की मांग है कि जब मृतकों के स्वजनों को सरकारी नौकरी व हाथियों के खेत में आने पर मारने का आदेश दिया जाए। देर रात मृतकों के स्वजनों को सात-सात लाख का मुआवजा व परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी के आश्वासन के बाद ग्रामीण बंधक दोनों अफसरों को मुक्त कर दिया।

गौरतलब हो कि शुक्रवार की रात में राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगलों से हाथियों का एक झुंड पंजनहेड़ी के खेतों में आया था। बताया गया कि पांच हाथियों के झुंड में से 4 हाथी तो वापस जंगल में लौट गए, लेकिन एक हाथी खेतों में ही रुक गया। इसने सुबह भी किसानों पर हमले का प्रयास किया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने कई टीमें बनाकर हाथी को एक गन्‍ने के खेत में घेर लिया। वन विभाग ने दिन में खेत में पानी छोड़कर उसे पिलाया भी ताकि वह शांत रहे।

हालांकि, देर शाम वन विभाग के कर्मचारियों ने जब हाथी को जंगल में वापस खदेड़ा तो उसने पहले जियापोता गांव की महिला 35 वर्षीय बबीता पत्‍नी अमरीश कुमार को अपने चपेट में ले लिया। हाथी ने उस पर हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं पंजनहेड़ी निवासी किसान सुरेंद्र (60 वर्ष) खेतों में पानी देने के लिए गया था, जिसे हाथी ने कुचल कर मौत के घाट उतार दिया। इससे नाराज पंजनहेड़ी के ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे डीएफओ आकाश कुमार वर्मा व रेंजर दिनेश प्रसाद नौडियाल को एक दुकान में बंद कर लिया।

सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे लक्सर विधायक संजय गुप्ता व हरिद्वार ग्रामीण विधायक स्वामी यतीश्वरानंद घटनास्थल पर पहुंचे उन्होंने किसी तरह दुकान से बाहर निकालकर वन अधिकारियों को बैठाया। गुस्साए ग्रामीणों ने थोड़ी देर बाद ही फिर से डीएफओ व रेंजर को एक मकान में बंद कर बंधक बना लिया। मृतक किसान के परिजनों में से एक को सरकारी नौकरी व खेतों पर आने वाले हाथियों को मारने का आदेश जारी किया जाए। देर रात प्रशासनिक अधिकारियों के ग्रामीणों के मुआवजे व परिवार से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने के वादे के बाद ग्रामीणों ने बंधक अधिकारियों को मुक्त किया।

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