सोशल मीडिया में कौन कर रहा है ”खेल” 

त्रिवेंद्र रावत को राज्य में खलनायक साबित करने का खेल

पोस्ट लिखने वाले और कटाक्ष करने वाले हैं चंद ही लोग

आम लोग भी बगैर तह में जाकर कर रहे हैं कमेंट

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को राज्य विरोधी बताने का खेल चल रहा है। खास बात यह है कि पोस्ट डालने वाले और उस पर तत्काल नकारात्मक टिप्पणी करने वालों के नाम अंगुलियों पर गिने जा सकते हैं। हालात ये है कि राज्य के आम नागरिक सत्यता की तह में जाने की बजाय त्रिवेंद्र को खलनायक बताने में नहीं हिचक रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर ये चंद लोग आखिर किसके हाथों की कठपुतली बने हुए हैं ?

सोशल मीडिया में इन दिनों मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ एक अभियान सा चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से उनकी छवि को राज्य विरोधी दिखाने की कोशिश की जा रही है। ऐसा करने वाले चंद लोग ही हैं। ये लोग कोई पोस्ट लिखते हैं तो इनकी टीम में शामिल लोग तत्काल ही नकारात्मक टिप्पणियों की बौछार सी कर देते हैं। आम लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं कि अंदरखाने क्या खेल क्या है और इसे कौन और क्यों खेला जा रहा है। उन्हें भी लगने लगता है कि सरकार गलत कर रही है। ऐसे में वो भी इस पर नकारात्मक टिप्पणी कर रहे हैं।

ताजा मामला शराब का है। आम लोगों को शायद ही पता हो कि बाटलिंग प्लांट और डिस्टलरी में क्या फर्क है। डिस्टलरी में शऱाब बनाई जाती है और तमाम तरह का प्रदूषण होता है। लेकिन बाटलिंग प्लांट में तो कई प्रदूषण होता ही नहीं है। किसी के इशारे पर काम कर रहे लोगों ने आम लोगों को भड़काने के लिए इसे शराब फैक्टरी का नाम दे दिया। हालात ये हैं कि शुरुआती दौर में इस प्लांट को मंजूरी देने वाले हरीश रावत भी इसके खिलाफ लिखने लगे। नतीजा ये रहा है कि त्रिवेंद्र को उत्तराखंड का खलनायक बताने वाली पोस्ट से सोशल मीडिया भरी पड़ी है। आम लोग भी यही समझ रहे हैं कि वास्तव में त्रिवेंद्र ने देवभूमि के साथ छल किया है। जबकि वास्तविकता इसके एकदम उलट है। उत्तराखंड के प्रख्यात लोक लायक नरेंद्र सिंह नेगी ने पहाड़ का सच उजागर किया तो ये टीम उनके खिलाफ भी जहर उगल रही है।

अगर इस पर नजर डाली जाए तो ऐसी पोस्ट डालने वालों की संख्या अंगुलियों की गिनती पर ही सिमट जाएगी। इतना ही नही, नकारात्मक टिप्पणियां करने वाले भी कुछ ही लोग हैं। अगर इन लोगों की फेसबुक की सदस्यता सूची को देखा जाए तो सभी कामन फ्रेंड हैं। इतना ही नहीं, ये सभी एक नेता की मामूली सी बात को भी इस तरह से प्रचारित कर रहे हैं मानों उसने उत्तराखंड के लिए क्या-क्या न कर दिया है।

बताया जा रहा है कि इसके पीछे सीएम की कुर्सी को लेकर जागा मोह है। राज्य का मुखिया बनने का मंसूबा पाले हवा -हवाई नेता जी परदे के पीछे ही सियासी गेम खेल रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि त्रिवेंद्र को इन पोस्ट के सहारे पार्टी के मुखिया को बताया जा सके कि वो किस कदर बदनाम हो चुके हैं। ऐसे में राज्य को नए नेतृत्व की जरूरत है। 

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