लॉकडाउन तोड़ने का मामलाः कहां गायब हो गए विधायक त्रिपाठी के गनर सहित चार लोग

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यूपी के बिजनौर में मात्र सात लोगों की गिरफ्तारी से उठा सवाल

यूपी में गिरफ्तार होने वालों में देहरादून नंबर वाली गाड़ी का मालिक, दो गनर और एक अन्य शख्स नहीं

अपर मुख्य सचिव की पैरवी वाले पत्र में शामिल थे दो गनर के नाम 

पुलिस ने तलाश करने की कोशिश नहीं की इन लोगों को 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
देहरादून। लॉकडाउन में  यूपी के विधायक के साथ उत्तराखंड में सैर सपाटा करने दो गनर सहित चार लोग कहां गायब हो गए। मुनिकी रेती में 11 लोगों की गिरफ्तारी की गई। यहां से निजी मुचलके पर छूटकर यूपी में प्रवेश करने पर बिजनौर जिला में सात लोग गिरफ्तार हुए। सवाल उठता है कि विधायक त्रिपाठी की टोली में शामिल चार लोग कहां गायब हो गए। इनके साथ वो उत्तराखंड के देहरादून नंबर वाली गाड़ी भी गायब है।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम का सहारा लेकर उत्तराखंड के अपर मुख्य सचिव ने यूपी के विधायक त्रिपाठी और उनके दस साथियों को पहाड़ की सैर कराने में भरपूर मदद की। उन्होंने न केवल देहरादून जिला प्रशासन को तीन गाड़ियों में 11 लोगों को सैर कराने की परमिशन देने की पैरवी की, वहीं रुद्रप्रयाग, चमोली और पौड़ृी के जिलाधिकारी आवश्यक कार्यवाही के लिए भी निर्देशित किया। 
अपर मुख्य सचिव ने जिन लोगों को लॉकडाउन के दौरान बदरीनाथ, केदारनाथ की यात्रा कराने के लिए जिला प्रशासन को आदेश दिए थे, उनमें यूपी के विधायक अमनमणि त्रिपाठी, जय प्रकाश तिवारी, माया शंकर सिंह, मनीष कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, रितेश यादव, उमेश चौबे, ओम प्रकाश यादव, अजय यादव (गनर), श्री प्रकाश पासवान (गनर) तथा विनय सिंह शामिल हैं। जिन तीन गाड़ियों के नंबर दिए गए थे, उनमें दो उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्रेशन वाली हैं और एक का रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड के देहरादून में हुआ है। 

 

उत्तराखंड नंबर वाली गाड़ी जय प्रकाश तिवारी के नाम पर रजिस्टर्ड है। संभवतः यह शख्स वहीं हैं, जिनका नाम विधायक के साथ उत्तराखंड घूमने वाले लोगों में शामिल है। हालांकि देहरादून जिला प्रशासन ने केवल नौ लोगों को ही परमिशन दी थी। परमिशन में दोनों गनर अजय यादव व श्री प्रकाश पासवान के नाम हटा दिए गए। 
विधायक त्रिपाठी ने देहरादून जिला प्रशासन की परमिशन का भी उल्लंघन करते हुए दस अन्य लोगों के साथ तीन गाड़ियों में सैर सपाटा किया। कर्णप्रयाग से खदेड़े जाने के बाद इन लोगों को मुनिकी रेती में गिरफ्तार कर लिया गया। जहां गिरफ्तार होने के बाद मुचलकों पर सभी को छोड़ दिया गया। 
बिजनौर में  फिर गिरफ्तारी के वक्त विधायक के साथ छह लोग माया शंकर सिंह, रितेश यादव, संजय कुमार सिंह, ओम प्रकाश यादव, उमेश चौबे,. मनीष कुमार शामिल हैं। अब सवाल उठता है कि चार अन्य लोग, जिनमें जय प्रकाश तिवारी, दो गनर अजय यादव व श्री प्रकाश पासवान तथा विनय.सिंह नाम का शख्स कहां गायब हो गए। अगर चार लोग उत्तराखंड के निवासी हैं, तो पुलिस और प्रशासन ने इनको तलाश क्यों नहीं किया।
सवाल यह भी है कि अपर मुख्य सचिव के पत्र में जिन दो लोगों को गनर बताया गया है कि क्या वो सरकारी स्तर पर विधायक की सुरक्षा में तैनात हैं या फिर प्राइवेट गनर हैं। यदि ये यूपी पुलिस के गनर हैं तो लॉकडाउन तोड़ने के आरोप में इन पर अभी तक विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की गई। क्या ये प्राइवेट गनर सहित सभी लोग उत्तराखंड के हैं। अभी तक इस बारे में कोई जांच क्यों नहीं हुई, यह सवाल भी उठाया जा रहा है।