जब जांच को टीम के आने से पहले ही गेट पर ताला जड़ गायब हुआ भू-माफिया

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मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को दिए थे जांच के आदेश 

भू-माफिया के बुलंद हौसलों के आगे जिला प्रशासन मलता रह गया हाथ 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
देहरादून : प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा सीमा पर देश की रक्षा कर रहे फौजी अधिकारियों की जमीन को हड़पने के मामले जिलाधिकारी को जांच के आदेश के बाद भी भू-माफिया के हौसले बुलंद नज़र आ रहे हैं।  प्राप्त जानकारी के अनुसार SDM डोईवाला के नेतृत्व में जांच को टीम मौक़ा मुआयना करने आने ही वाली थी कि भू-माफिया टीम के आने से पहले ही गेट पर ताला जड़ गायब हो गया और एसडीएम के नेतृत्व में जांच के लिए गयी टीम हाथ मलती रह गयी। सूत्रों से पता चला है कि सीमा पर तैनात जिन फ़ौजी अधिकारियों की जमीन पर भू -माफिया ने जबरन कब्जा किया हुआ है वहीं इसी जमीन के आस पास की वन विभाग सहित ग्राम पंचायत और भी न जाने किस-किस की जमीन को यह भू-माफिया डकार गया है। 
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ठीक इसी तरह कांग्रेस के एक पूर्व मंत्री ने भी इसी जमीन के आस पास इसी तरह से वन विभाग की कई बीघा जमीन भी हड़पी हुई है जो बीते कुछ साल पहले ख़बरों की सुर्खियां बन चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सत्ता में रहे ऐसे नेताओं द्वारा जब इस तरह से सरकारी जमीनों पर कब्जा किया जाता रहेगा तो इससे भू-माफियाओं के तो हौसले बुलंद होंगे ही।  
गौरतलब हो कि बीती सात अक्टूबर कोदेव भूमि मीडिया” ने ” वो सीमा पर देश की एक-एक इंच भूमि की रक्षा करता रहा और यहां भूमाफिया ने कब्जा ली उसकी जमीनशीर्षक से एक समाचार प्रकाशित किया था। हालांकि यह समाचार वरिष्ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला के फेसबुक वाल से ली गई थी जिसमें उन्होंने लिखा था जिस कुकरेती परिवार को विरासत में देश सेवा का तमगा मिला हो। जिस परिवार ने देश को ले. जनरल प्रेम कुकरेती और कर्नल आरसी कुकरेती समेत आधा दर्जन से अधिक सैन्य अफसर दिये हों। और उस परिवार के दो वीर सपूत आज भी देश की सीमाओं पर देश की एक-एक इंच भूमि की रक्षा कर रहे हों, उस परिवार की मेहनत की कमाई की जमीन भूमाफिया ने कब्जा ली।
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लाॅकडाउन का लाभ उठाकर भूमाफिया ने बड़कली मोहम्मदपुर में ले. कर्नल कार्तिक की पांच बीघा जमीन कब्जा कर अवैध बैंक्वेट बना लिया और वहां प्लाटिंग भी कर दी। श्रीनगर से दिल्ली और दिल्ली से देहरादून पहुंच कर ले. कर्नल कार्तिक आज जब माफिया से बात करने पहुंचे तो माफिया विवेक ने बड़े-बड़े अफसरों और वन, राजस्व विभाग के अधिकारियों को अपना पनाहगार बताते हुए कहा कि उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा। ये बात सच भी है क्योंकि बिना वन, भू और एमडीडीए की मिलीभगत से यह कब्जा हो भी नहीं सकता था।
अब सवाल यह उठता है जब भू-माफिया सरकारी अमले के जांच पर आने से पहले ही गेट पर ताले जड़कर गायब हो जाए तो साफ़ है कि आँखिन न कहीं कोई झोल तो जरूर है जो मजिस्ट्रेट पावर अपने पास होने वाले एसडीएम गेट पर ताले देखकर लौट जाए यह कहा जा सकता है एसडीएम पर कहीं न कहीं कोई दबाव जरूर है अन्यथा एसडीएम अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए ताले नहीं तोड़ सकता था और भूमि की पैमाइश नहीं कर सकता था।  बात साफ़ है कि जब शासन -प्रशासन में यदि इच्छा शक्ति होती तो सीमा पर देश की रक्षा कर रहे सैन्य अधिकारियों की जमीन कबकी खाली हो चुकी होती।