मा. न्यायालय ने जिरह सुनने के बाद सुरक्षित कर दिया फैसला

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

नैनीताल : जोत सिंह बिष्ट बनाम सरकार एवं पांच अन्य याचिका पर जिनमें याचिका कर्ताओं द्वारा दो से अधिक बच्चे वालों पर चुनाव लड़ने पर रोक लगाने के अलावा तीन अन्य बिंदुओं पर याचिकाकर्ता जोत सिंह बिष्ट की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह नेगी ने अपना पक्ष रखते हुए पूर्व में मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा विभिन्न मामलों में दिये गए फैसलों को नजीर के रूप में पेश किया।

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन तथा जस्टिस आलोक वर्मा की डबल बेंच के सम्मुख याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह नेगी, डॉक्टर पांडे, संदीप कोठारी, कांडपाल, विपुल शर्मा, अंजली बेलवाल, राजीव बिष्ट, डॉक्टर महेंद्र सिंह पाल आदि ने पुरजोर तरीके से अपनी बातें रखी वह माननीय पीठ ने भी गंभीरता से सुना। तदुपरांत महाधिवक्ता श्री बाबुलकर तथा चीफ स्टैंडिंग काउंसिल परेश त्रिपाठी ने सरकार का पक्ष रखा। सभी का पक्ष सुनने के उपरांत माननीय उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख दिया है।

विद्वान अधिवक्ता श्री नेगी ने कहा कि सरकार को अधिकार है कि वह कानून बनाये, लेकिन सरकार को यह भी बताना चाहिए कि जो कानून बना है, जिस से कई हजार लोग चुनाव लड़ने से वंचित हो रहे हैं, इस से क्या हासिल होगा।

इस पर सरकार की तरफ से कहा गया कि परिवार नियोजन व जनसंख्या नियंत्रण इस कानून को बनाने का उद्देश्य है। अब ऐसे में सभी की उम्मीद मा. न्यायालय के फैसले पर है, क्योंकि जिनके पहले ही दो से अधिक संतान हैं उनको चुनाव लड़ने से रोकने पर कैसे जनसंख्या नियंत्रण होगा, इसका कोई ठोस जबाब सरकार के पक्ष से नहीं आया।

पंचायत जनाधिकार मंच उत्तराखंड के संस्थापक संयोजक श्री जोट सिंह बिष्ट ने कहा हम सभी याचिकाकर्ता अपने पक्ष में हमारे अधिवक्ता समूह द्वारा की गई पैरवी से पूरी तरह आस्वस्त हैं कि न्याय हमारे पक्ष में होगा।

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