मंत्रियों और ब्यूरोक्रेसी के बीच तल्खी से रुक रहा विकास !

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून: सरकार में मंत्रियों और अधिकारियों के बीच समन्वय का न होना वहीं सूबे की ब्यूरोक्रेसी द्वारा मनमाने फ़ैसले लेने की आदत और अपने हित के लिए सूबे के धन की बर्बादी की ख़बरों के बाद अब मामला परिवहन विभाग से जुड़ा हुआ सामने आया है जब परिवहन मंत्री के आदेशों को विभागीय अधिकारियों ने हवा में उड़ा दिए और लंबगांव के पास नौ स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत हो गयी। सूबे की ब्यूरोक्रेसी ने यदि परिवहन मंत्री के आदेशों पर गंभीरता से अमल किया होता तो शायद स्कूली बच्चों को जान से हाथ नहीं धोना पड़ता। 

गौरतलब हो कि उत्तराखंड में मंत्रियों और ब्यूरोक्रेसी के बीच लगभग प्रत्येक  सरकार के दौरान तल्खी और आदेशों को हवा में उड़ाने के चलते आमना-सामना होता रहा है। बीते पांच वर्षो की ही बात करें तो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कई बार तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, इंदिरा हृदयेश यहां तक कि स्वयं तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ब्यूरोक्रेसी की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।

वहीं मौजूदा सरकार में कई विधायक सूबे की ब्यूरोक्रेसी के रवैये की शिकायत मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित पार्टी के तमाम मंचों पर कर चुके हैं। इतना ही नहीं वन एवं पर्यावरण मंत्री हरक सिंह रावत ने कंडी सड़क पर तो बीते दिनों ब्यूरोक्रेसी के रवैये से नाराज होकर इस्तीफा देने तक की धमकी दे डाली थी।

इस बार  ताजा मामला परिवहन मंत्री यशपाल आर्य का है।परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने 25 जुलाई को विधानसभा में परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान आयुक्त परिवहन को ओवरलोडिंग व स्कूली बच्चों को लेकर जाने वाले वाहनों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। लंबगांव में स्कूली बच्चों के हादसे में मारे जाने तक इस आदेश को हुए 10 दिन बीते चुके हैं लेकिन विभाग के कुछ ही क्षेत्रों में और वह भी नाममात्र को यह अभियान चलाकर मंत्री के आदेशों को हवा में उड़ा दिया और इसी लापरवाही के चलते नौ बच्चे असमय ही काल के गाल में समा गए।

परिवहन मंत्री यशपाल आर्य के मुताबिक उन्होंने सोमवार को सचिव परिवहन शैलेष बगोली से फोन पर अभियान के संबंध में जानकारी तो ली ही थी साथ ही अभियान को गम्भीरता पूर्वक शुरू न करने पर गहरी नाराजगी तक जताई थी। इसी बीच मंगलवार को हादसे के बाद परिवहन मंत्री की सचिव से नाराजगी और बढ़ गई है, जिसकी शिकायत उन्होंने मुख्यमंत्री से भी की है। उन्होंने कहा यदि समय रहते परिवहन विभाग के आला अधिकारी उनके आदेशों का संज्ञान लेते तो शायद लंबगांव हादसा न होता और नौ बच्चों को अपनी जान न गंवानी पड़ती।

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