• इच्छुक लोग अपने पूवर्जों के नाम और गांव आदि भेजेंगे मॉरीशस दूतावास

  • हरिद्वार, बदरीनाथ और केदारनाथ में सैकड़ों सालों से बन रही बही में  तलाशा जायेंगे पूर्वज 

  • मॉरीशस भी उत्तराखंड से आने वाले यात्रियों मिलेगी छूट

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून :  उत्तराखंड पर्यटन विभाग अब प्रवासी भारतीयों की भारत में उनकी जड़ों को ढूंढने में मदद करेगा। इसकी शुरुआत फिलहाल मॉरीशस में बसे अप्रवासी भारतीयों से की जा रही है। मॉरीशस दूतावास इच्छुक लोगों अपने पूवर्जों के नाम और गांव आदि की जानकारी यहां भेजेंगे। हरिद्वार, बदरीनाथ और केदारनाथ में सैकड़ों सालों से बन रही बही में इनको तलाशा जाएगा। उम्मीद जताई जा रही कि ऐसे में कई अप्रवासियों को उनकी जड़ें यानी भारत में उनके मूल निवास स्थान के संबंध में जानकारी मिल सकेगी।

विधानसभा में उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और मारीशस के उच्चायुक्त जगदीश गोवर्धन ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी साझा की। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि पुरातन काल से लोग हरिद्वार, बदरीनाथ और केदारनाथ आते रहे हैं। यहां पंडों द्वारा बनाई जाने वाली पोथियों में इन यात्रियों के नाम दर्ज होते हैं। ऐसे में यदि कोई अपने पूर्वजों या गांव के नाम जानते होंगे तो वह यहां आकर इनके बारे में जानकारी ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि मॉरीशस स्थित महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट में भारत से मॉरीशस गए सभी लोगों के रिकॉर्ड हैं। मॉरीशस से यह रिकॉर्ड भारत मंगाए जाएंगे, जिससे इन स्थानों पर लोग अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी हासिल कर अपनी जड़ों के बारे में भी जान सकें।

इस दौरान मॉरीशस के उच्चायुक्त जगदीश गोवर्धन ने बताया कि उनका देश जल्द ही उत्तराखंड पर्यटन विभाग से एक करार पर हस्ताक्षर करेगा। इसके तहत मॉरीशस से भारत आने वाले तीर्थ यात्रियों को पर्यटन विभाग के गेस्ट हाउस में छूट प्रदान की जाएगी। इसके अलावा साहसिक पर्यटन, आर्थिक और सांस्कृतिक विरासत का आदान-प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मॉरीशस भी उत्तराखंड से आने वाले यात्रियों को इसी तरह की छूट देगा। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि अभी करार के मसौदे का अध्ययन किया जाएगा और फिर इसके बाद करार को अंतिम रूप दिया जाएगा।

इसी माह मॉरीशस से 80 लोग भारत आए थे और अब सितंबर में 200 लोगों का एक दल फिर भारत व उत्तराखंड भ्रमण पर आएगा। उन्होंने कहा कि मॉरीशस के अलावा उत्तराखंड बाली, सूरीनाम, फिजी व त्रिनिदाद आदि अन्य ऐसे देशों से जहां भारतीय प्रवासी हैं उनके साथ करार कर उनके पूर्वजों को ढूंढने में भी मदद करेगा

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