हाई कोर्ट के सख्ती के बाद तिवारी ने खाली सरकारी मकान

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नैनीताल : हाई कोर्ट की सख्ती के बाद पूर्व सीएम और दिग्गज नेता एनडी तिवारी ने भी सरकारी आवास खाली कर दिया है। एनडी के अधिवक्ता की ओर से हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह हलफनामा दायर किया गया है। रूरल लिटिगेशन इनटाईटिललमेंट केंद्र देहरादून के अवधेश कौशल ने जनहित याचिका दायर कर राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिले सरकारी आवास व अन्य सुविधाएं वापस लेने के लिए सरकार को निर्देशित करने का आग्रह किया था।

कोर्ट ने सभी के आवास खाली करने के आदेश पारित किए थे। हाल में पूर्व सीएम एनडी ने ठंड का हवाला देकर आवास को लेकर मोहलत मांगी थी। जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस सुधांशु धुलिया की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने पूर्व सीएम का 23 करोड़ बकाया वसूलने का आदेश पारित करने का आग्रह किया। खंडपीठ ने दो सप्ताह में सरकार से बाजार दरों के आधार पर किराये का ब्यौरा कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश पारित किए।

गौरतलब हो कि इससे सूबे के चारों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपने सरकारी आवास खाली कर दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भी अपना आवास खाली कर दिया। प्रदेश के चारों पूर्व मुख्यमंत्रियों में से केवल विजय बहुगुणा ही ऐसे हैं, जिन्होंने अपने आवास का पूरा किराया भी जमा किया है। शेष मुख्यमंत्रियों ने फिलहाल आवास का किराया जमा नहीं किया है। हाईकोर्ट ने बीते वर्ष एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सूबे के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को 15 फरवरी तक सरकारी आवास खाली करने के निर्देश दिए थे। इस कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूड़ी और रमेश पोखरियाल निशंक ने देहरादून में अपने सरकारी आवास खाली कर दिए थे। 

अपर सचिव राज्य संपत्ति विभाग का कहना है कि अभी नारायण दत्त तिवारी और विजय बहुगुणा के आवास खाली नहीं हुए हैं, लेकिन कुछ दिनों पूर्व वे निर्धारित तिथि तक आवास खाली करने की बात कह चुके हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों में से केवल एक ने ही किराया जमा किया है। जल्द ही इस मामले की हाईकोर्ट में तारीख है। शासन की ओर से चीफ स्टैंडिंग काउंसिल को सभी सूचनाएं भेज दी गई हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्य के पहले व पूर्व मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी को छोड़कर सभी पूर्व मुख्यमंत्री सरकारी आवासों पर काबिज थे। उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी आवास की सुविधा समाप्त करने के निर्णय के पश्चात उत्तराखंड हाईकोर्ट में इस संबंध में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी। वहीँ याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से स्पष्टीकरण तलब करने के साथ ही इन्हें आवास खाली करने के निर्देश दिए थे। इसके क्रम में शासन की ओर से सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास खाली करने का नोटिस जारी किया गया था।