देहरादून । राजाजी टाईगर रिजर्व में अब बाघ और अन्य जानवरों की सही संख्या का पता लगाया जा सकेगा। इसके लिए एक फरवरी से पार्क क्षेत्र में बाघ व अन्य जानवरों की गणना का काम शुरू होगा। वन्य जीवों की सटीक गिनती के लिए इस बार पूरे पार्क में 300 कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे।

राजाजी टाईगर रिजर्व में बाघों की गिनती के लिए शनिवार को वन कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। पार्क अधिकारियों के अनुसार यह चैथे चरण का प्रशिक्षण है। पहले तीन प्रशिक्षण में साइन सर्वे व ट्रांजिट लाइन के बारे में जानकारी दी जा चुकी है। समूचे पार्क में कैमरा ट्रैप के जरिए बाघ व अन्य जानवरों की सटीक गणना हो सकेगी। कैमरा ट्रैप लगाने व इनके जरिए प्राप्त चित्रों के अध्ययन के बारे में वन कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया।

डब्लूआइआइ के वैज्ञानिक इस कार्य में वन कर्मियों की मदद कर रहे हैं। पार्क निदेशक सनातन ने बताया कि राजाजी के बेहतर हैबिटैट के चलते यहां बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। गुर्जर पुनर्वास का भी पफायदा हुआ है। बफर जोन में टाईगर की मौजूदगी के चलते यहां मैन पावर बढ़ाने के साथ ही हर वक्त चैकस नजर रखी जा रही है। इससे पूर्व जनवरी 2014 में राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए द्वारा भी गणना कराई गई थी। जिसमें बाघों की संख्या के मामले में उत्तराखंड पूरे देश में दूसरे नंबर पर रहा। पार्क की चीला, गौहरी व रवासन रेंज में बाघ सबसे अधिक मौजूद हैं।

वहीँ दूसरी तरफ  देश के पहले कंजरवेशन रिजर्व आसन वेटलैंड में प्रवास पर आए परिदों की विधिवत गणना को विशेषज्ञों द्वारा की गयी। अपर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम शनिवार को पूरे दिन प्रवासी परिंदों की गणना मे  लगी रही। वैसे इस बार प्रवासी परिंदों के पसंदीदा मड टापू की संख्या घटने पर परिदे यमुना व डाकपत्थर बैराज क्षेत्र में भी चले गए हैं। जिसके चलते आसन वेटलैंड में प्रवासी परिदों की संख्या इस बार कम होने की संभावना जताई जा रही है।

आसन नमभूमि क्षेत्र में इस बार प्रवासी परिदों की 20 प्रजातियां प्रवास पर हैं। बारिश के बाद आसन झील का जलस्तर बढ़ने से मड टापू कम होने पर इस बार प्रवासी परिदों की कई प्रजातियां यमुना व डाकपत्थर बैराज झील चली गई हैं। आसन नमभूमि में टाइपफा घास बढ़ने से भी प्रवासी परिदे असहज महसूस कर रहे हैं। चकराता वन प्रभाग की लोकल गणना में आसन नमभूमि क्षेत्र में प्रवासी परिदों की संख्या सात हजार के करीब आंकी जा रही है। लेकिन, सही संख्या विधिवत गणना के बाद ही पता चलेगी। अपर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव डाॅ. धनंजय मोहन के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम विधिवत गणना शुरू कर दी।

Advertisements