तीन गुना बढ़ा मिला किराया और समय भी गंवाया, जनता के हाथ कुछ नहीं आया !

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सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस के चलने पहले ही उठ रहे सवाल ?

 पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस के चलने के बाद उठे सवाल ? 

जनता ने की मांग इन रेलों के साथ मसूरी एक्सप्रेस व गढ़वाल एक्सप्रेस को भी चलाया जाए 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून :  रेल मंत्रालय ने  उत्तराखंड के टनकपुर रेलवे स्टेशन से (Tanakpur To Delhi) दिल्ली के लिए  पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस (Purnagiri Janshatabdi Express) और आगामी तीन मार्च को कोटद्वार से दिल्ली (Kotdwar to Delhi) के बीच सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस (Sidhhabali Janshatabdi Express) ट्रेन को लेकर प्रदेश में प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कुमायूं मंडल के टनकपुर और गढ़वाल मंडल के कोटद्वार से चलने वाली इस रेलों को लेकर इलाके के लोगों का कहना है यह तो पुरानी बोतल में नई शराब परोसना जैसा हुआ, ये रेल तो पहले भी गढ़वाल एक्सप्रेस के नाम से चलती थी जिसका नाम बदलने और किराया बढ़ाने को किसने कहा था हमने तो यात्रा समय कम करने की मांग की थी। लोगों ने नाराज़ होते हुए कहा कि उस चेयर कार का क्या करना इससे अच्छा तो हमारी वही रेल अच्छी थी किराया तो कम था, हमें तो छह -सात घंटे में दिल्ली पहुंचा देते तो रेल मंत्रालय का अहसान होता, कम से कम हमारा समय और पैसा तो बचता लेकिन इन रेलों के चलने से हम जहां पुरानी चलने वाली ट्रेनों से भी हाथ मलते रह गए वहीं समय और पैसा जो बर्बाद होगा वह अलग।  

वहीं दूसरी तरफ कोटद्वार से दिल्ली के लिए सिद्धबली बाबा के नाम से (Sidhhabali Janshatabdi Express) जनशताब्दी एक्सप्रेस को चलाने की सभी तैयारियां रेल विभाग (Railway) ने पूरी कर ली है। आजकल रेल कर्मचारी व अधिकारी कोटद्वार स्टेशन की साफ सफाई कर अपनी अपनी तैयारियां कर रहे हैं।  लेकिन पूर्णागिरि एक्सप्रेस की तरह अब इस ट्रेन चलने से पहले ही ट्रेन को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। आम जनता का कहना है कि इस ट्रेन से को कोई लाभ नहीं होने वाला है। हमारी मुख्य मांग ट्रेन के समय को बदलने को लेकर थी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

कोटद्वार व्यापार मंडल इस का पुरजोर विरोद्ध करेगा। इस ट्रैन को नहीं  चलने दिया जाएगा। हमको हमारी पुरानी ट्रैन ही हमें वापस चाहिए।
इधर सोशल मीडिया पर यह सन्देश भी वायरल हो रहा है कि कोटद्वार गढ़वाल के लोगो को सरासर बेवक़ूफ़ बनाया जा रहा है। एक ट्रेन को बन्द कर नाम बदल कर दूसरी ट्रेन को चलाना।जबकी कोटद्वार के लिए ये ट्रेन नये समय के अनुसार चलानी चाहिये थी। वाह रे क्या नाटक हैं। कोटद्वार वाले इसी के लायक हैं। पहले लखनऊ का कोच बंद किया फिर मसूरी एक्स बंद गढ़वाल एक्स बंद। अब सरासर बेवकूफ बनाया जा रहा है और कोटद्वार के लोग ताली बजा रहे। शुक्रिया अदा कर रहे।यहाँ के जनप्रतिनिधि कहाँ हैं ये पता ही नहीं।जब जनता चुप रहना और जुल्म सहना सीख जाती है तो राजा निरंकुश हो जाता है। कोटद्वार व्यापार मंडल इस का पुरजोर विरोद्ध करेगा। इस ट्रैन को नही चलने दिया जाएगा। हमको हमारी पुरानी ट्रैन ही वापस चाहिए।

स्थानीय लोगों ने कहा कि ये जो ट्रेन चलने वाली है ये तो पुरानी ट्रेन पर नया लेबल चिपका दिया है। हमारी मांग थी कि ट्रेन सुबह कोटद्वार से चलती और रात को वापस आ जाती, तब जाकर व्यापारियों व आम जनता को इसका लाभ मिलता। वे एक ही दिन में दिल्ली से अपना काम कर लौट सकते थे।

वहीं  टनकपुर से चलने वाली जनशताब्दी एक्सप्रेस के तोहफे से खुश सीमांत के लोगों को ट्रेन की यात्रा अवधि ने निराश किया है। एक्सप्रेस पर टनकपुर से दिल्ली तक का सफर पौने दस घंटे का होगा, वहीं यात्रियों को चेयर में बैठे-बैठे सफर तय करना होगा।लोगों को उम्मीद थी कि जनशताब्दी के चलने से दिल्ली का सफर सात घंटे का होगा, लेकिन लोगों की उम्मीद के विपरीत जनशताब्दी में भी दिल्ली का सफर पौने दस घंटे का होगा। वहीं चेयर ट्रेन होने से लोगों को पौने दस घंटे का थकाऊ सफर भी चेयर पर बैठकर तय करना होगा। 

लेकिन ये फुल AC ट्रैन होने के बावजूद पैसेंजर ट्रेन (Passenger Train) की तरह 20 स्टेशनों पर रुकेगी। इसमें जनरल डिब्बे भी नहीं है, लोगों को तीन गुना किराया देना होगा और अपने दस घंटे भी जाया करने पड़ेंगे,तो आम जनता को इसका लाभ कैसे मिल पाएगा। लोगों का कहना है कि इसके साथ मसूरी एक्सप्रेस व गढ़वाल एक्सप्रेस को भी चलाया जाए, क्योंकि सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस या पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस का आम जनता लाभ नहीं उठा सकती है। साथ ही इन ट्रेनों के समय को भी बदले जाने की स्थानीय लोगों ने मांग की है। इन सब विरोधों के बीच रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों ट्रेनों की चेयरें बेहद आरामदेह हैं और यात्रियों को अवश्य ही सफर में आनंद मिलेगा।