दि हंस फाउंडेशन ने मासिक धर्म को लेकर चलाया जागरूकता अभियान

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बागेश्वर :  मासिक चक्र के दौरान समाज या परिवार से महिलाओं को अलग करने वाले कुरीति एवं सामाजिक वर्जनाओं की बात आज भी व्याप्त है। आज भी कई गांवों में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को गौ शाला में रखा जाता है, उन्हें अपने घर में प्रवेश करने की इजाजत नहीं होती। वे किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में भाग नहीं ले सकती और उन्हें मासिक चक्र के दौरान किसी को भी छूने की अनुमति तक नहीं होती हैं। इसके परिणामस्वरूप घाटी में महिलाओं और लड़कियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सामाजिक दबाव के कारण, महिलाओं को स्वास्थ्य और स्वच्छता पर ज्ञान या सही जानकारी नहीं मिल रही है।यह सब सामने आया है जान दि हंस फाउंडेशन के आईवीडीपी प्रोग्राम के तहत बागेश्वर की खाती घाटी में फाउंडेशन ने ग्रामीण इलाकों का व्यापक अध्ययन किया। 

दि हंस फाउंडेशन ने एक संगठन ‘जल आपूर्ति एवं स्वच्छता संयोजन परिषद’ (डब्लूएसएससीसी) के साथ मिलकर इन सामाजिक वर्जनाओं  के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का फैसला किया है। डब्लूएसएससीसी संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी है जो दुनिया भर के कमजोर लोगों के बीच स्वच्छता और आवश्यकताओं पर काम कर रही है।

दि हंस फाउंडेशन ने गांव के कुछ पुरुषों और महिलाओं को अपने कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया, जिन्हें इसके बारे में प्रशिक्षित किया जा सके। प्रशिक्षण के बाद यही दल इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाएगा। बागेश्वर गांव में दि हंस फाउंडेशन के द्वारा 5 दिवसीय ट्रेनिंग आयोजित की गयी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 30 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। अब ट्रेनिंग के 4 महीने पूरे हो चुके हैं और इन लोगों ने अपने संबंधित गांवों में बदलाव का काम शुरू कर दिया है।

इन मुद्दों को जानने और व्यवहार में बदलाव लाने में समय लगता है, लेकिन हंस फाउंडेशन ने स्थानीय लोगों के परिवारों में बदलाव देखना शुरू कर दिया है। आशा है कि लड़कियों और महिलाओं को जल्द ही इन  वर्जनाओं  से छुटकारा मिलेगा।