उत्तराखंड में वनाग्नि पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पीसीसीएफ को कहा…. हाज़िर हो

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हाई कोर्ट ने तेजी से फैल रही वनाग्नि का मीडिया में चल रहे समाचारों का संज्ञान लेते हुए सरकार से किया जवाब तलब 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
नैनीताल : उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर तेजी से फैल रही वनाग्नि का मीडिया में चल रहे समाचारों का संज्ञान लेते हुए सरकार से पूछा है कि वनाग्नि नियंत्रण के लिए क्या तैयारियां की गई हैं ? इसको लेकर और भी क्या उपाय तथा विकल्प सुझाए गए हैं? इसकी स्पष्ट रिपोर्ट बुधवार को कोर्ट को बताएं। मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा है कि वर्तमान में चल रही कोरोना महामारी के लिए भी वनाग्नि नुकसानदेह है। धुंध और ऐसे मौसम में कोरोना पीड़ितों को सांस संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। जंगल की आग से यह नई समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
नैनीताल उच्च न्यायालय ने प्रकरण में प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक को  बुधवार यानि कल वीडियो कांफ्रेंसिंग से व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में पेश होने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा प्रदेश सरकार की ओर से जंगल की आग पर नियंत्रण के लिए तैयारियों का पूरा ब्योरा भी मांगा गया है। उच्च न्यायालय ने वनाग्नि के मामले को ‘In the matter of protection of forest area, forest health and wild life’ पर स्वत: संज्ञान लिया है। हालांकि इससे पूर्व हाईकोर्ट के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली और राजीव बिष्ट ने उत्तराखंड हाई कोर्ट को प्रदेश में  धधक रहे जंगलों के संबंध में अवगत कराया गया था।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली और राजीव बिष्ट ने अपनी जनहित याचिका में कहना था कि वर्तमान में प्रदेश भर के विभिन्न स्थानों पर कई जंगल वनाग्नि की चपेट में धधक रहे हैं। दूसरी ओर प्रदेश सरकार की ओर से इस संबंध में कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। जबकि हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में जंगलों को आग से बचाने को गाइडलाइन जारी कर चुकी है। कोर्ट ने जंगलों की आग बुझाने के लिए गांव स्तर से ही कमेटियां गठित करने को कहा था, जिस पर आज तक कोई अमल नहीं किया गया। न्यायालय को बताया गया कि सरकार की ओर से दावाग्नि पर नियंत्रण के लिए हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया में काफी खर्चा आ रहा है। इसके बावजूद इस प्रबंध से भी जंगलों की आग बेकाबू हो रही है। लिहाजा सरकार को चाहिए की गांव स्तर पर कमेटियां गठित कर वनाग्नि पर नियंत्रण की पहल करने की व्यवस्था करनी चाहिए।