दलाल और ब्लैकमेलर उमेश कुमार पर सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम फैसला

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ब्लैकमेलर कथित पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट से सुप्रीम झटका

वसूलीमैन उमेश कुमार की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

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साभार  एन एन आई ब्यूरो
नई दिल्ली : खुफिया कैमरे की आड़ में पत्रकारिता का चोला ओढ़कर सरकार से वसूली करने वाले दलाल पत्रकार मिस्टर उमेश कुमार पर देश की सर्वोच्च अदालत ने सुप्रीम फैसला दिया है। स्टिंगबाज उमेश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने तीन आपराधिक मामलों को देहरादून की अदालत से दिल्ली अदालत में ट्रांसफर करने की अर्जी लगाई थी। मगर, सर्वोच्च अदालत ने इस अर्जी को ठुकरा दिया है। ऐसे में उमेश कुमार को बहुत बड़ा झटका लगा है।

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सुप्रीम कोर्ट की न्यायधीश न्यायमूर्ति ऋषिकेश राॅय की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि स्टिंग आॅपरेशन को अंजाम देने वाली टीम के सदस्य स्वयं अपनी पत्रकारिता पर सवाल खड़े कर रहे है, लिहाजा इन मामलों को ट्रांसफर करने का सवाल ही नहीं होता है। बता दें कि जिन तीन मामलों को उमेश कुमार ने देहरादून से दिल्ली ट्रांसफर करने की अर्जी लगाई थी, उनमें दो संपत्ति और बिल से जुडे़ हुए हैं। उमेश कुमार ने कोर्ट में यह भी कहा था कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार उन्हें निशाना बना रही है।
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जानिए, उमेश कुमार का गंदा इतिहास…

अवैध तरीके से कब्जा करने, अवैध वसूली की नीयत रखने वाले दलाल पत्रकार उमेश कुमार स्टिंगबाजी में माहिर है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री हरीश रावत का भी स्टिंग कर पैसों की डिमांड की। वहीं, वर्तमान भाजपा सरकार को भी अपने इशारे में नचाने और अस्थिर करने की नाकाम कोशिश करने दलाल पत्रकार पर दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध में भी मामला दर्ज है। उन पर 17 मामले उत्तराखंड, 04 उत्तर प्रदेश, 05 पश्चिम बंगाल और 02 मामले दिल्ली के है। इसके अलावा एक मामला ऐसा भी है जिस पर सीबीआई अपनी जांच कर रही है। कुल मिलाकर उमेश कुमार पर 29 मामले चल रहे है। इतने मामले जिस व्यक्ति पर चल रहे हो, उसे अगर आपराधिक प्रवृत्ति का इंसान कहा जाए, तो गलत कुछ भी नहीं होगा।

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मामले 29 और अरेस्टिंग केवल एक में ही

उमेश कुमार पर उन्हीं की टीम के संपादक ने ब्लैक मेलिंग करने और सरकार गिराने के लिए साजिश रचने का आरोप लगाया था। इसी मामले में वसूलीमैन उमेश कुमार की अरेस्टिंग हुई थी, मगर, हाईकोर्ट नैनीताल ने उसे बेल दे दी। इसके बाद हाईकोर्ट में एक याचिका वसूलीमैन के वकीलों ने दी, जिसमें सरकार की ओर से दायर वादों को खारिज करने को कहा गया था, लेकिन इसे हाईकोर्ट ने ठुकरा दिया। यहां के बाद सुप्रीम कोर्ट में वसूलीमैन के सभी वादों में स्टे दे दिया। सरकार की ओर से भी विद्वान अधिवक्ताओं ने जोरदार जिरह की और सुप्रीम कोर्ट को यह बता पाने में कामयाब हुए कि उमेश पर 27 से ज्यादा मुकदमें चल रहे हैं, मगर अरेस्टिंग सिर्फ एक ही केस में हुई है।

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