देहरादून। मौजूदा समय छात्रवर्ग में नशे का प्रचलन बढऩा समाज के लिए नुकसानदेय साबित हो रहा है। फिलहाल दून पुलिस की ओर से नशा विरोधी मुहिम को लेकर सर्वाेदय अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें पुलिस के आलाअधिकारी स्कूलों, कालेजों में नशे से होने वाले नुकसान से लोगों को अवगत कराते हुए नशे के विरोध में जागरूकता बढ़ा रहे हैं। आंकड़ो के अनुसार नशा विश्वभर में तीसरे नम्बर का अपराध बताया जाने लगा है।

दून की बात करें तो नशाखोरी रोकने या कम करने की मुहिम पुलिस की ओर से छेड़ी गई हैै। जिसके तहत आए दिन विभिप्प थाना क्षेत्र में पुलिस नशा तस्करों की धरपकड़ कर रही है। द्रोणनगरी की बात करें तो नशे की समस्या नासूर बन चुकी है। विशेषकर द्रोणनगरी के छात्र नशा माफियाओं के निशाने पर बताए जाते हैं। दून के युवाओं में नशे की जड़े गहरी होती देख पुलिस अधिकारियों की ओर से समय-समय पर नशा माफियाओं की धरपकड़ के लिए मुहिम चलाई जाती रही है।

आए दिन नशे के साथ पकड़े जा रहे तस्करों को देखकर एक बात समझा जा सकता है कि पुलिस नशा तस्करों की धरपकड़ के लिए जितनी मुस्तैदी दिखा रही है, उसका खास असर नशा तस्करों पर पड़ता नहीं दिख रहा है। आंकड़ों के अनुसार दूनभर में एक वर्ष के भीतर करीब पांच सौ के करीब नशा तस्कर पुलिस की गिरफ्त में आए हैं। सूत्रों की माने तो तमाम मामलों में पकड़े गए तस्कर मात्र नशा तस्करी में केरियर का काम करने वाले निकले। असल नशा माफिया तक पुलिस के हाथ अभी नहीं पहुंच सके हैं। जबकि यदि दून से नशे को समूल खत्म करने के लिए नशा माफियाओं के नेटवर्क को भेदना जरूरी है।

तारीफ करनी होगी, पुलिस के ऐसे नशा विरोधी अभियानों की, जिसमें पुलिस ने तस्करों को नशे के जखीरे के साथ गिरफ्तार किया है। मगर एक कड़वी सच्चाई यह भी है और इसे पुलिस अधिकारियों को भी मानना होगा कि दून में नशा युवाओं के सिर चढक़र बोल रहा है। हालात यह बताए जाते हैं कि छात्र वर्ग छोटी-छोटी बात पर पार्टी करने में नहीं हिचकिचाते और घर पहुंचने पर ऐसे युवा नशे की हालत में पाए जाते हैं। पुलिस की गिरफ्त में आए नशा तस्करों में अधिकांश की ओर से छात्रों, निजी संस्थानों में अध्ययनरत युवाओं को नशा परोसने की बात स्वीकारा जाना भी इस बात को तस्दीक करता है कि माफियाओं के निशाने पर कौन है।

भांग, गांजा, सुल्फा जैसे सस्ते नशे से लेकर मलाली क्रीम, स्मैक और फिर चरस आदि के साथ-साथ प्रतिबंधित दवाओं-इंजेक्शनों को नशे के रूप में इस्तेमाल का खेल दून में धड़ल्ले से चलना एक और कड़वी हकीकत है। पुलिस के आला अधिकारी भी इस बात से इत्तेफाख रखते होंगे कि नशा विरोधी मुहिम चलाने और छोटी-छोटी मात्रा में नशा पकड़े जाने मात्र से ही दून को नशा मुक्त नहीं किया जा सकता। नशे के साथ पकड़े गए तस्करों में अधिकांश का पुलिस से कहना कि ‘उसने नशे की खेप देकर यहां भेजा था और ‘इसने यह नशे की खेप लेनी थी। नशा लाने वाला भले ही पकड़ा जाता हो, मगर ‘उसने  और ‘इसने  हमेशा ही पुलिस पकड़ से दूर बने रहते हैं। हिमाचल प्रदेश, सहारनपुर, बरेली आदि जगहों के साथ-साथ प्रदेश के पर्वतीय इलाकों से भी नशा तस्करी के जरिए दून पहुंचाए जाने की बात से तो अधिकांश लोग वाकिफ हैं। मगर कम ही लोग जानते हैं कि अफगानिस्तान का नशा भी पंजाब होते हुए दून के नशेडि़यों को उपलब्ध कराया जा रहा।

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