उत्तराखंड लोक सेवा अधिकरण नेे किया वरिष्ठ पुुलिस अधीक्षक तथा पुलिस महानिरीक्षक केे आदेश कोे निरस्त

मामले का किया निराकरण

देव भूमि मीडिया ब्यूरो
काशीपुर। उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारी अधिकारियों केे सेवा सम्बन्धी मामलों का निर्णय करनेे वालेे विशेष न्यायालय (ट्रिब्युुनल) की नैैनीताल पीठ नेे स्पष्ट किया कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को किसी सब इंस्पैक्टर को अवनत करने का दंड देने का अधिकार नहीं हैै औैर न ही कार्मिकोें कोे सत्यनिष्ठा प्र्रमाण पत्र रोकनेे का दंड दिया जा सकता हैै। उत्तराखंड लोेक सेवा अधिकरण नेे सब इंस्पैक्टर अकरम अहमद कोे एस.एस.पी.उधमसिंह नगर द्वारा दिये गये दण्डादेेशों को निरस्त कर दिया तथा इससेे संबंधित आई.जी.कुुमाऊं केे अपील आदेेशों कोे भी निरस्त कर दिया।
वर्तमान में बागेेश्वर जिलेे में तैनात पुुलिस सब इंस्पैैक्टर अकरम अहमद की ओेर से अधिवक्ता नदीम उद्दीन नेे लोेक सेेवा अधिकरण नैैनीताल पीठ में मार्च 2019 मेें याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि काशीपुर थाने में तैनाती के दौैरान जनवरी 2018 में यह आरोप लगाते हुये कि उसने सट्टा चलानेे वालों के विरूद्ध कार्यवाही नहीं की तथा ऐेसी गैैर कानूनी गतिविधि की अनुमति दी पर पुलिस उपाधीक्षक काशीपुर द्वारा जांच की गयी। इसके उपरान्त अपर पुलिस अधीक्षक काशीपुुर द्वारा विभागीय कार्यवाही की गयी तथा वरिष्ठ पुुलिस अधीक्षक उधमसिं नगर नेे अकरम अहमद केे पक्ष पर विचार किये बगैैर उसे सत्यनिष्ठा प्र्रमाण पत्र रोेकनेे तथा एक वर्ष के लिये सब इंस्पैक्टर के न्यूनतम वेतनमान पर अवनत करने का दंड देे दिया गया। इसकी श्री अकरम नेे अपील की जिस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कियेे बगैैर तत्कालीन आई.जी. जोेन कुुमाऊं पूरन सिंह रावत ने इनकी अपीलोें कोे निरस्त कर दिया। इस पर श्री अकरम द्वारा अपनेे अधिवक्ता नदीम उद्दीन केे माध्यम से उत्तराखंड लोेक सेेवा अधिकरण की नैैनीताल पीठ में दावा याचिका दायर की। याचिका में अकरम अहमद के विरूद्ध विभागीय दंण्ड के आदेशों को निरस्त करनेे का निवेदन किया गया। पुुलिस विभाग व सरकार की ओर से प्रति शपथ पत्र दाखिल करके दण्ड आदेेशों तथा अपील आदेेशोें कोे सही बताते हुुयेे याचिका निरस्त करनेे की प्रार्थना की गयी।
याचिकाकर्ता की ओर सेेे अधिवक्ता नदीम उद्दीन ने सुुप्रीम कोेर्ट के विजय सिंह बनाम स्टेेट आॅॅफ यू.पी. के निर्णय सहित विभिन्न रूलिंग प्रस्तुुत करतेे हुये सत्यनिष्ठता प्रमाण पत्र रोेकने का दंड देेनेे का अधिकार विभागीय अधिकारी को नहीं होेनेे तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उधमसिंह नगर, पुलिस अधिनियम के अन्तर्गत सब इंस्पैक्टर को अवनत करने का दंड देने का अधिकार न होने का तर्क दिया तथा दंड आदेश तथा अपील आदेेशों को निरस्त होेनेे योग्य बताया।
अधिकरण केे उपाध्यक्ष राम सिंह तथा ए.एस. नयाल की पीठ नेे श्री नदीम के तर्कों सेे सहमत होते हुुये अपने निर्णय मेें स्पष्ट किया कि सम्बन्धित सेवा नियमावली में सत्यनिष्ठा प्रमाण पत्र रोेकनेेे का दंण्ड शामिल नहीं है तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कोे सब इंस्पैक्टर को केवल निन्दा प्रविष्टि तथा एक माह तक वेतन के जुर्मानेे से दंडित करनेे का ही अधिकार हैै। उसेे कोई अन्य दंड देेनेे का अधिकार नहीं है। इसलियेे यह दण्ड नहीं दिये जा सकते है।
अधिकरण की नैनीताल पीठ नेे एक वर्ष के लिये सब इंस्पैक्टर के न्यूनतम वेतनमान पर अवनत ककरनेे के दण्डादेश दिनांक 01-08-2018 तथा सत्यनिष्ठा प्रमाण पत्र रोकनेे संबंधी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उधमसिंह नगर के दण्डादेेश दिनांक 07-09-2018 तथा इससे सम्बन्धित पुुलिस महानिरीक्षक कुुमाऊं नैनीताल केे आदेश की पुुष्टि करनेे वालेे अपील आदेशों दिनांक 30-10-2018 को निरस्त करने का आदेेश दिया। विपक्षियों कोे याचिका कर्ता केेे सेेवा अभिलेेखोें सेे सम्बन्धित प्रविष्टियों को हटानेे कोे भी आदेेशित किया गया हैै। अधिकरण नेे इस क्लेेम पिटीशन का फैसला दायर होेने सेे आठ माह मेें किया है।

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