देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

कर्णप्रयाग। उत्तराखण्ड की शेष बची एक मात्र विधानसभा सीट पर सभी दलों की निगाहें लगी हुयी है। इस सीट पर आगामी 9 मार्च को विधानसभा चुनाव होना है। इस सीट की जीत के लिए अब राजनैतिक दल गैरसैंण का राग अलापने लगे हैं। इस समय स्थिति यह है कि इस सीट पर गैरसैंण राजधानी का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा बन कर उभर रहा है। यहां सभी दल गैरसैंण को राजधानी बनाने की बात कर रहे हैं।

बताते चलें कि यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस के प्रत्याशी व वर्तमान विधानसभा के उपाध्यक्ष अनुसूया प्रसाद मैखुरी व भाजपा के सुरेन्द्र नेगी के बीच सिमटा दिख रहा है। वहीं इस सीट पर प्रदेश के जनांदोलनों के सबसे तेजतर्रार युवा नेता भाकपा(माले) के प्रत्याशी इन्द्रेश मैखुरी भी पूरे विधानसभा सीट में भाजपा व कांग्रेस को उत्तराखण्ड विरोधी बता कर दोनों को चुनौती दे रहे हैं। सबसे रोचक बात यह है कि कांग्रेस के प्रत्याशी अनुसूया प्रसाद मैखुरी व भाजपा के धुर विरोधी दल भाकपा(माले) के प्रत्याशी इन्द्रेश मैखुरी दोनों एक ही गांव यानी मैखुरा के मूल निवासी है। वहीं भाजपा के प्रत्याशी सुरेन्द्र सिंह नेगी गैरसैंण क्षेत्र के है।

सुरेन्द्र नेगी भी हालांकि कांग्रेसी नेता रहे हैं। उनको भाजपा में भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद खंडूडी ने सम्मलित कराया था। वे पूर्व ब्लॉक प्रमुख होने के साथ साथ गत चुनाव में बहुत कम मतों से पराजित हुए थे। यहां समीक्षकों का ऐसा आंकलन था कि अगर विधानसभा चुनाव 15 फरवरी को ही होते तो उसमें भाजपा का पलड़ा भारी लग रहा था। कांग्रेसी प्रत्याशी मैखुरी बहुत ही मिलनसार व विनम्र नेता है। गैरसैंण के वे भी प्रखर समर्थक रहे।

गैरसैंण में विधानसभा भवन बनाने व विधानसभा सत्र करा कर कांग्रेस स्वयं गैरसैंण का सबसे बड़ा एकमात्र हितैषी साबित करने की कोशिश कर चुकी है। वहीं भाजपा के प्रत्याशी राजधानी के मुद्दे पर अधिकांश समय चुप्पी साधे रही। भाजपा के राजनैतिक विरोधियों ने वैसे भी राग अलापना शुरू कर दिया है कि गैरसैंण अधिवेशन की उपेक्षा करने वाली भाजपा भी बनी गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की पक्षधर बन रही है। बहरहाल नौ मार्च को कर्णप्रयाग विधानसभा सीट पर मतदान होना है। इसके बाद मतगणना तक इंतजार करना होगा। देखना है इसबार  प्रतिष्ठित हुई कर्णप्रयाग विधानसभा सीट पर इस बार कौन बाजी मारता है।

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