• सुबह 3 बजे से देर रात्रि 12- 1 बजे तक सेवा दे रही है शटल 

  • रात्रि व सायं 8 से 9 बजे के बीच  होना पड़ता है बहुत सक्रिय 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

गुप्तकाशी :  भले ही इस शटल सेवा को संचालित करने में RTO कार्मिकों को, अत्यधिक थकाने वाली सेवा को, सावधानी और परिश्रम से निष्पादन करना पड़ता है। यात्रा के चरम समय विशेषतः मई और जून मे तो सुबह 3 बजे से शटल सेवा के इच्छुक यात्रियों लंबी पंक्ति लग जाती है जो देर रात्रि 12- 1 बजे तक केदारनाथ व गौरीकुंड से लौटने वाले यात्रियों के साथ चलती रहती है। लगभग 120 के आसपास मैक्सीज सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच अधिक से अधिक 5 km के 6 से 7 मीटर चौड़े रास्ते पर अनवरत बैडमिंटन की शटल की तरह दोनों पार्किंग के बीच बिना रुके चलती रहती है और कई बार तो 30- 40 हज़ार से अधिक यात्रियों को न केवल ढोते है बल्कि उन्हें पहले सलीके से व्यवस्थित तरीके से वाहनों में बिठाते हैं।

जिस कार्य मे घंटो तक देश के भिन्न भिन्न भागों से आये लोगों को डील करना टेढ़ी खीर होता है । कई बार तो स्थिति बड़ी विकट हो जाती है। इस अत्यधिक इस संकरे और अत्यधिक हाई प्रोफाइल मार्ग पर सुरक्षित एवम सुविधाजनक परिवहन संचालन के लिए RTO कार्मिक सुबह 4 बजे से रात्रि 1 बजे तक गाड़ियों का नियमानुसार संचालन सुनिश्चित करतें हैं। यद्यपि पहले के वर्षों में RTO ने अपने सीमित कार्मिको के बूते यह भारी भरकम व्यवस्था सोनप्रयाग में संभाली । लेकिन इस वर्ष 2019में पुलिस का सहयोग भी रहा । लेकिन सोनप्रयाग में पुलिस कर्मियों द्वारा सुबह की 4 से 12 की शिफ्ट के बाद उपलब्ध न होने से RTO कर्मियों पर ही सारा भार पड़ता है।

बार -बार संज्ञान में लाये जाने पर पुलिस द्वारा 12 से सायं 8 तक कि शिफ्ट में सहयोग किया जाता है। लेकिन सोनप्रयाग में RTO के वही कर्मी सुबह की प्रथम शिफ्ट से रात्रि की तीसरी शिफ्ट के लिए न केवल यातायात व्यवस्था के नियमन अपितु शटल सेवा के विधिवत संचालन हेतु स्थानीय वाहन संचालको के संपर्क में तो रहते ही हैं अपितु उन्हें यात्रियों के लिए मित्रवत सेवा देने के लिए भी मोटिवेट करते है।

RTO कार्मिक वाहनों की उपलब्धता बनाये रखने के अक्तिरिक्त यह सुनिश्चित भी करते है कोई वाहन चालक खतरनाक वाहन संचालन न करे। सोनप्रयाग और गौरीकुंड के मध्य लाइन में लगने वाले यात्रियों को छोड़, पैदल जाने वाले यात्रियों से अधिक धन के बदले बीच रास्ते मे ही यात्रियों को ढोने वाले चालको पर नियंत्रण करने हेतु बार बार सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच निगरानी करने हेतु प्रवर्तन का कार्य भी साथ -साथ किया जाता है।

रात्रि का भाड़ा अधिक होने से वाहन चालकों की आवाजाही 8 से 9 बजे के बीच बहुत सक्रिय रहना पड़ता है क्योंकि 9 बजने की प्रतीक्षा में वहां चालक बीच मार्ग में ही खड़े हो जाते हैं और पंक्तियों में वहां की प्रतीक्षा में लगे यात्रियों का धैर्य खोने से रतो कर्मियों को दो चार होना पड़ता है।।

मई -जून में यात्रा के चरम दिनों में यह लगभग 18 घंटे की कमरतोड़ ड्यूटी RTO के कार्मिक रहने,खाने , ड्यूटी साइट में किसी उपयुक्त व्यवस्था के अभाव में पूरी तत्परता से करते हैं । शायद ही कोई कार्मिक ड्यूटी समापन के पश्चात स्वास्थ्य की दृष्टि से सामान्य रह पाता हो। मई और जून में यात्रा के चरम समय मे सीमित कार्मिको के बाद भी RTO द्वारा शटल सेवा का विगत कई वर्षों से सफल संचालन सराहनीय है।

RTO से परिवहन अधिकारी हरीश सती, जो इस यात्रा के शुरुआत से इसके संचालन के लिए आते रहे हैं, का मानना है कि यह केदारनाथ यात्रा में सबसे महत्त्वपूर्ण सेवाओं में से एक होती जा रही है या कहें यात्रा की रीढ़ बनती जा रही है। इसलिए सरकार को इसे अधिक व्यवस्थित तरीके से संपादित करने हेतु यात्रियों और RTO कार्मिकों के लिए स्थायी व्यवस्थायें कर शटल सेवा को और अधिक सुगम और प्रभावी बनाने के प्रयास होने चाहिए। क्योंकि मई जून में तो यह सेवा बहुत ही क्रिटिकल हो जातीहै।

Advertisements