कांग्रेस से भाजपा में आये मंत्रियों के यहाँ अभी वह माहौल नहीं 

अधिकांश बागियों के यहाँ भाजपा के बजाय कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का अब भी जमावड़ा

भाजपा कार्यकर्ताओं को मंत्रियों व पदाधिकारियों के किचन से लेकर बेडरूम तक में घुसने की आज़ादी 

राजेन्द्र जोशी 

देहरादून: उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने लगभग पांच महीने पूरे कर लिए लेकिन पार्टी के कार्यकर्ताओं में सरकार के प्रति उत्साह नज़र नहीं आ रहा है जो प्रदेश की जनता तक यह सन्देश दे कि सब कुछ ठीक चल रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत सहित धन सिंह रावत, प्रकाश पन्त, मदन कौशिक, अरविन्द पाण्डेय पूरे जोर से सरकार का सन्देश जन-जन तक देने पर भले ही लगे हों लेकिन कांग्रेस से बागी होकर भाजपा में आये हरक सिंह रावत को छोड़ शेष सभी मंत्री अभी भी भाजपा को आत्मसात नहीं कर पाए हैं परिणामस्वरूप भाजपा का सूबे में सरकार होने का सन्देश वह जनता तक नहीं पहुँच पा रहा है जो पहुंचना चाहिए था।

गौरतलब हो कि कांग्रेस से बागी होकर भाजपा में आये डॉ.हरक सिंह रावत सहित यशपाल आर्य, सुबोध उनियाल और रेखा आर्य को भाजपा ने मंत्री पद से नवाजा है।लेकिन भाजपा कार्यकर्ता आज भी हरक सिंह को छोड़ शेष कांग्रेस से भाजपा में मंत्रियों के घरों व कार्यालयों तक में जाने में अपने आपको असहज महसूस कर रहा है क्योंकि उसे वहां वह वातावरण नहीं दिखायी देता जो भाजपा के मंत्रियों अथवा पदाधिकारियों के यहाँ उसे मिलता है। वैसे भी यदि देखा जाय तो भाजपा के खांटी कार्यकर्ताओं का अपने मंत्रियों व पदाधिकारियों के किचन से लेकर बेडरूम तक में घुसने की आज़ादी रही है और भाजपा के नेता इसे बुरा भी नहीं मानते क्योंकि भाजपा के नेता भी प्रवास के दौरान होटलों व सरकारी गेस्ट हाउस में रुकने के बजाय कार्यकर्ताओं के घरों में प्रवास करने को ज्यादा अहमियत देते रहे हैं और यह संघ की परम्पराओं में भी शामिल है। इसके पीछे संघ का तर्क यह रहा है कि इससे कार्यकर्ताओं से आत्मीयता से जुड़ाव होता है, इससे उसका पार्टी या नेता से एक नाता भी जुड़ता है जिसे तोड़ना न कार्यकर्ता के लिए आसन होता है और न नेता के लिए।

उत्तराखंड के मंत्रिमंडल में डॉ. हरक सिंह रावत को छोड़ शेष सभी कांग्रेस बैकग्राउंड के नेता हैं डॉ.रावत का राजनीतिक जीवन जहाँ विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता के रूप में शुरू होकर भाजपा के नेता तक पहुंचा है और वे कल्याण सिंह सरकार में पहली बार मंत्री भी बने हालाँकि उन्होंने कई कारणों से भाजपा छोड़ बसपा से लेकर कांग्रेस तक की राजनीती की और हर बार सुर्ख़ियों में रहे लेकिन अब उनकी घर वापसी हो चुकी है यही कारण है कि वे भाजपा व संघ के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं से अब भी उसी नजदीकी से मिलते रहे हैं जैसे पिछले 20 साल पहले मिला करते थे। शेष मंत्रियों में यशपाल आर्य से लेकर सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल और रेखा आर्य तक अभी भी भाजपा व संघ के करीब नहीं आ पाए है या यूँ कहें भाजपा व संघ को आत्मसात नहीं कर पाए हैं।यही कारण है इनका कभी जिलाधिकारी को लेकर विवाद तो कभी अपने सचिव को लेकर विवाद सुर्ख़ियों में रहता रहा है। जहाँ तक विधायकों का सवाल है इनमें उमेश शर्मा काउ,प्रदीप बत्रा,सौरभ बहुगुणा आदि का भी कमोवेश यही हाल है। जबकि अमृता रावत, शैला रानी रावत , विजय बहुगुणा और डॉ.शैलेन्द्र मोहन सिंघल भी अब यदा -कदा ही नज़र आते हैं। 

एक भाजपा विधायक का कहना है कांग्रेस से भाजपा में आये मंत्रियों के यहाँ अभी वह माहौल नहीं बन पाया है कि वहां भाजपा के विधायक या कार्यकर्ता बैठ सकें क्योंकि सूबे के ऐसे कई वे मंत्री जो कांग्रेस छोड़ भाजपा में आये हैं उनके यहाँ भाजपा के बजाय कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहता है ऐसे में भाजपा कार्यकर्ता ऐसे मंत्रियों के यहाँ अपने को असुरक्षित और असहाय पाता है क्योंकि न तो उसे वहां कोई पहचानता है और नहीं वहां बैठे लोग ही उसे महत्व देते हैं।लिहाज़ा वह अपना सा मुंह लेकर वहां से लौटने को मजबूर हो जाता है।

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