स्कॉलर होम स्कूल पूर्व में नाम विद्या मन्दिर जूनियर हाई स्कूल

नाम परिवर्तन कर स्कॉलर होम रखा लेकिन शिक्षा विभाग के पास कोई प्रमाण

जाखन स्थित स्कूल की मान्यता 2013 में हो चुकी है समाप्त

ऐस्लेहॉल की मान्यता कभी ली ही नहीं गई

शैक्षिक प्रमाण पत्रों की वैधता पर भी सवालिया निशान

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून । स्कॉलर होम स्कूल के प्रबंधन द्वारा उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करते हुए अधिकतम मूल्य की प्राइवेट पब्लिशर की पुस्तकें लगाना, बिना मान्यता के स्कूलों को संचालित करना के द्वारा अध्ययनरत बच्चों के माता पिता से नियम विरुद्धर फिस लेना, स्पोर्ट्स-डे और फाउंडर्स-डे के नाम पर कॉशन मनी लेना, हर वर्ष नियम विरुद्ध फीस बढ़ाना, स्कूल द्वारा अनुबंधित बुक एंव स्टेशनरी विक्रेता द्वारा खरीद पर बिल मांगे जाने पर बिल न देना, इन सभी मामलों में नेशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स द्वारा उच्य न्यालय में जनहित याचिका दायर कि जा रही है।

नेशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स द्वारा पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि स्कूल में अधिकतम पुस्तकें लगाना स्कॉलर होम स्कूल पिछले वर्ष तिमाही परीक्षा के समय के अलावा प्राइवेट पब्लिशर्स की अधिकतम मूल्य की पुस्तकें अपने मुनाफे के लिए लगाई जिसकी  शिकायती पत्र अभिभावकों द्वारा दिनांक 31/08/2018 को जिलाधिकारी को दिया गया था जिस पर जिलाधिकारी द्वारा मुख्य शिक्षा अधिकार को जांच के लिए आदेशित किया गया जिसकी जाँच समिति द्वारा 11 सितम्बर 2018 और 24 सितम्बर 2018 को की गई जिसमें अभिभावकों द्वारा की गयीं शिकायत सही पाई गई थी जिस पर मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा स्कॉलर होम स्कूल को आदेशित किया गया था कि  लगाये गये सभी किताबों को वापस लेते हुए सभी अविभावकों के पैसे वापस लौटाये जाएं जोकि आज तक नही लौटाए गये हैं, इस सारे प्रकरण मे शिक्षा विभाग की मिलीभगत भी उजागर होती है। 

उन्होंने कहा किसी भी बोर्ड से बिना मान्यता लिए ही स्कूल का संचालन किया जा रहा है उन्होंने बताया स्कॉलर होम स्कूल जिसका पूर्व में नाम विद्या मन्दिर जूनियर हाई स्कूल था को अंग्रेजी माध्यम में  दिनांक 5 सितम्बर 1969 को प्रथम मंडल मेरठ शिविर देहरादून अति शिक्षा निदेशक उत्तर प्रदेश इलाहाबाद से ली गई थी यह स्कूल कहां पर संचालित है इसका कोई पता नही है और यदि उसका नाम परिवर्तन करके स्कॉलर होम रखा गया है तो शिक्षा विभाग के पास भी इसका कोई प्रमाण नही दिया गया है जो कि मांगे जाने पर शिक्षा विभाग द्वारा कोई भी प्रमाण पत्र  उपलब्ध नहीं कराया गया है कि जिसे यह प्रमाणित हो पाए कि इसका परिवर्तनीय नाम स्कॉलर होम स्कूल है।

उन्होंने कहा इस स्कूल के दो ब्रांच संचालित किया जा रहे हैं पहला 153 राजपुर रोड जाखन मे जो की क्लास के.जी. से लेकर इण्टर तक संचालित है ऐस्लेहॉल राजपुर रोड़  पर स्थित हैं जो कि क्लास केजी से लेकर क्लास 9 तक संचालित है जाखन स्थित स्कूल की मान्यता 2013 में समाप्त हो चुकी है और ऐस्लेहॉल की मान्यता कभी ली ही नहीं गई है जिस कारण पूर्व में भी शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल को बन्द करने का आदेश जारी कर दिया गया है।

लेकिन शिक्षा विभाग की मिलीभगत के कारण अब तक स्कूल को बन्द नहीं किया गया है जिसके चलते इस स्कूल मे पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं कि मार्कशीट और शैक्षिक प्रमाण पत्रों की वैधता पर भी सवालिया निशान खड़े होते हैं जिस स्कूल की मान्यता ही न हो उस स्कूल के  प्रमाण पत्रों की क्या मान्यता होंगी इस स्कूल में कुल 2020 बच्चे पढ़ रहे हैं उनके भविष्य के साथ स्कूल संचालक एवं शिक्षा विभाग की मिली भगत से खिलवाड़ किया जा रहा है।

उन्होंने कहा शासन और प्रशासन सिर्फ और सिर्फ पत्र-व्यवहार, जांच और नोटिस तक ही सिमट कर रह गया है । जिला परियोजना अधिकारी द्वारा 02 जनवरी 2019 को नगर शिक्षा अधिकारी पत्र लिखा गया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धार (12) (1) ब के अंतर्गत स्कॉलर होम में अध्ययनरत छात्र ,छात्रों से किसी भी प्रकार का शुल्क लेना अवैधानिक है उन्होने कहा कि अतः अब तक के सारे प्रयास करने के बाद भी किसी विभाग ने अपना काम ईमानदारी से नहीं किया है इस कारण अब इसी सप्ताह नेशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स नैनीताल माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने जा रहे हैं।

पत्रकार वार्ता मे मुख्य रूप से एसोसिएशन के अध्यक्ष आरिफ खान ,उपाध्यक्ष नवीन लिंगवाल, महासचिव सुदेश उनियाल, सचिव धर्मेन्द्र ठाकुर, दीपचंद वर्मा ,अशोक सेमवाल, आकेश भट्ट, हितेन्द्र सक्सेना, संरक्षक सुशील त्यागी, मनमोहन साहनी इत्यादि उपस्थित रहे।

Advertisements