शिवाजी महाराज मानवता के आदर्श एवं प्रेरणास्त्रोत

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हिन्दुत्व के गौरव छत्रपति शिवाजी 

कमल किशोर डुकलान
छत्रपति शिवाजी महाराज भारत की पवित्र माटी में साहस, राज कौशल, कुशल प्रशासक, संगठनकर्ता और योजनाकार की सनातन प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने जीवन में अनेक उतार-चढ़ावों का सामना किया और पूरी निष्पक्षता से राज किया, कभी भी मर्यादा का हनन नहीं किया। इन्हीं गुणों के कारण छत्रपति शिवाजी आज भी भारतवासियों के दिल में बसे हैं। शिवाजी महाराज का आधुनिक भारत के निर्माण में अभूतपूर्व योगदान है। वे भारत में एक नायक के रुप में देखें जाते हैं।
शिवाजी महाराज की संगठन कुशलता का उदाहरण आज भी दिया जाता है। शिवाजी ने मराठों में जोश और स्वदेशाभिमान होने पर भी एकता की कमी देखी जिस कारण मराठा मुगलों से सफल नहीं हो पा रहे थे। इसलिए शिवाजी ने मराठों को एक-एक करके संगठित किया। उसके बाद तो मराठों की विजय पताका फहरने लगी। शिवाजी की राजकीय व्यवस्था और सेना खड़ी करने की क्षमता अद्भुत थी। उनकी न्याय व्यवस्था तो ऐसी थी कि दुश्मन भी इस मामले में उनकी तारीफ करते थे। छत्रपति शिवाजी हर व्यक्ति से कुछ न कुछ सीखने की कोशिश करते थे।
छत्रपति शिवाजी चाहते थे कि मराठों के साम्राज्य का विस्तार हो और उनका अलग से एक-एक राज्य हो। अपने इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने 28 वर्ष की आयु में अपनी एक अलग सेना एकत्रित करनी शुरू कर दी और अपनी योग्यता के बल पर मराठों को संगठित किया तथा एक अलग साम्राज्य की स्थापना की। उन्होंने जहाजी बेड़ा बनाकर एक मजबूत नौसेना की स्थापना की। इसलिए उन्हें भारतीय नौसेना का पिता कहा जाता है।
शिवाजी ने राज्य की चिरकालीन दृढ़ता के लिए अनेक संस्थाओं का निर्माण करवाया। औरंगजेब की प्रचंड शक्ति का सामना कर विजय प्राप्त करने में इन संस्थाओं का बहुत उपयोग हुआ। इस कारण स्वसंरक्षण और राज्यवर्धन, ये दोनों काम मराठा कर सके।
वामपंथी इतिहासकारों ने शिवाजी महाराज के बारे में अनेक गलत बातें की हैं। उन पर आरोप लगाया जाता है कि वे कट्टर हिंदू थे। यह गलत तथ्य है। शिवाजी हर विचारधारा और मत-पंथ सम्प्रदाय में सम्मानित थे। उन्होंने अपने शासन काल में सभी मत-पंथों सम्प्रदायों को पूर्ण स्वतंत्रता दी, लेकिन उन्होंने जबरन कन्वर्जन का विरोध किया था। इतिहास में कई ऐसे प्रसंग आते हैं जिनसे पता चलता है कि मस्जिदों और मकबरों की सुरक्षा के लिए भी उन्होंने फरमान जारी किया था। वे सूफी परंपरा का बहुत सम्मान करते थे। महान संत बाबा शरीफुद्दीन की दरगाह में वे प्राय: प्रार्थना करने जाया करते थे। इतिहासकार कफी खां और एक फ्रांसीसी पर्यटक बर्नियर ने उनकी धार्मिक नीतियों की प्रशंसा की है।
शिवाजी जैसे देशभक्तों की प्रेरणादायक कथाएं प्रत्येक भारतीय में त्याग, शौर्य एवं खुशहाल भारत की ज्योति प्रदीप्त करती है। शिवाजी ने आधुनिक भारत निर्माण के लिए अनेकों कार्य किए। वे एक महान देशभक्त थे और देश के लिए जीवन तक न्योछावर करने को तत्पर रहते थे। ऐसी महान विभूतियों को किसी देश की भौगोलिक सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। वे समस्त मानवता के लिए आदर्श और प्रेरणा के स्रोत होते हैं। उनकी अद्वितीय प्रतिभा,अदम्य साहस और समर्पित समाज और देशसेवा से वर्तमान एवं आने वाली पीढ़ियां भी मानवता का भविष्य उज्ज्वल करती हैं।