छात्रवृत्ति घोटाला : गीता राम नौटियाल को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, सात दिन के भीतर सरेंडर करने की पड़ी मार

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सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज करते हुए लगाई आरोपित को फटकार

कुर्की के लिए मुनादी करा चुकी है एसआइटी

छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआइटी गीताराम नौटियाल के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई करने के लिए एसआइटी ने 10 दिन पहले ही नोटिस चस्पा कर मुनादी भी कराई थी।

एसआइटी ने नोटिस के माध्यम से नौटियाल को सरेंडर करने के लिए एक माह का समय दिया, लेकिन नौटियाल इसकी बजाय सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए।

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपों से घिरे समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल को सुप्रीम कोर्ट ने सात दिन के भीतर एसआई टी के सामने पेश होकर को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं । नौटियाल उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट इस उम्मीद से गए थे कि उन्हें राहत मिल जाएगी और वे गिरफ्तार होने से बच जाएंगे। लेकिन अब उन्हें सात दिन के भीतर एसआईटी के समक्ष प्रस्तुत होना होगा। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज करते हुए आरोपित को फटकार लगाते हुए एसआइटी के सामने आत्मसमर्पण के आदेश भी दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में लगाया अधिवक्ताओं का जमावड़ा

गीताराम नौटियाल के रसूख का पता इसी बात से चलता है कि उन्होंने अपनी मजबूत पैरवी के लिए सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ताओं की फौज खड़ी की।

इनमें चार से पांच अधिवक्ता नैनीताल हाईकोर्ट के भी थे। एसआइटी की तरफ से भारत सरकार के महाधिवक्ता तुषार मेहता ने पक्ष रखा

छात्रवृति घोटाले की जांच की जद में आये गीताराम नौटियाल अब तक एसआईटी के सामने पेश होने से बचते रहे थे और जांच में सहयोग नहीं कर रहे संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने नैनीताल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन राहत नहीं मिल पाई थी। हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर एससीएसटी आयोग का रोक संबंधी आदेश भी रद्द कर दिया था। आरोपित की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआइटी के साथ-साथ उत्तराखंड सरकार, शासन, एसएसपी हरिद्वार को पक्षकार बनाया गया है।

शुक्रवार सुप्रीम कोर्ट ने नौटियाल की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने आरोपित की याचिका न सिर्फ खारिज कर दी, बल्कि फटकार भी लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि गिरफ्तारी से बचने के लिए तरह-तरह के तरीके अपनाए जा रहे हैं, मामले को लटका कर कानून का मजाक बनाया जा रहा है।  सुप्रीम कोर्ट ने आरोपित को सात दिन के भीतर एसआइटी के समक्ष सरेंडर करने का आदेश दिया है। एसआइटी प्रमुख मंजूनाथ टीसी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि गीताराम नौटियाल की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।