देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

तो क्या संघ दुष्कर्म के आरोपी को अपनाएगा!

भाजपा के तत्कालीन संगठन महामंत्री संजय कुमार को एक बार फिर आरएसएस के कुछ नेता पिछले दरवाजे से भीतर लाने का प्रयास कर रहे हैं ऐसा संघ के सूत्रों का कहना है। 

सूत्रों का कहना है कि भाजपा के बड़े तत्कालीन राष्ट्रीय नेता जिसे भाजपा से संघ में कुछ ही दिन पूर्व वापस बुलाया गया के नाक का बाल होने के चलते दुष्कर्म के आरोपी नेता को हरिद्वार में एक कार्यक्रम के दौरान एक बार फिर कोई जिमेदारी दिए जाने का तना-बाना बुना जाने लगा है। 

देहरादून : मीटू मामले में फंसे भाजपा के पूर्व महामन्त्री संगठन संजय कुमार की मुसीबतें अब बढ़ती हुई नज़र आ रही है। चर्चा है कि देहरादून पुलिस की जांच से नाराज पीड़िता ने अब मामले को देश के सर्वोच्च अदालत में पहुंचकर उसका दरवाजा खटखटाया है। चर्चा है कि सुप्रीम कोर्ट ने  पीड़िता की शिकायत की अर्जी को जनहित याचिका के रूप में सुनवाई के लिए स्वीकार कर दिया है। 

लोकसभा चुनाव से पूर्व प्रकाश में आये इस मीटू प्रकरण को भले ही भाजपा सरकार मैनज कर छिछालेदारी से खुद को बचाकर संगठन मंत्री की चुपचाप रातों रात भाजपा मुख्यालय से विदाई कर दी और भाजपा बिना नुकसान के चुनाव भी जीत गयी।  लेकिन पीड़िता द्वारा अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाये जाने की चर्चाओं के बाद भाजपा और आरोपी संजय कुमार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 

एक जानकारी के अनुसार पीड़िता द्वारा भाजपा नेता पर लगाए गए यौन शोषण के आरोपों की दून पुलिस द्वारा की गयी अब तक की जांच पर सवाल उठाते  हुए आरोपी को बचाने के आरोप लगाए गए हैं। चर्चा है कि पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट से न्याय की गुहार लगाते हुए अपने पत्र में कहा कि पुलिस द्वारा एक पक्षीय जांच करते हुए आरोपी को बचाने का पूरा प्रयास किया गया है।

यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि पुलिस जांच अधिकारी द्वारा इस मामले में आरोपी पर लगी धारा 376 को गलत तरीके से हटाकर आरोपी को बचाने का प्रयास किया गया है।  जबकि पीड़िता ने धारा 164 के कलमबद्ध बयानों में भी मजिस्ट्रेट के समक्ष उसके साथ दुष्कर्म किये जाने की बात कही थी। पीड़िता के मामले में पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है और न्याय न मिलने पर मजबूरन पीड़िता को सर्वोच्च न्यायालय की शरण में जाना पड़ा।

पीड़िता ने भाजपा के तत्कालीन संगठन महामंत्री पर भाजपा मुख्यालय में काम करने के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे।  मामले को भाजपा द्वारा पहले तो दबाने का भरसक प्रयास किये गए लेकिन जब मामला अखबारों की सुर्ख़ियों में आया और पीड़िता द्वारा मामले की रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज की गयी तो इसके बाद भाजपा ने अपनी छवि बचाने के लिए संजय कुमार को संगठन महा मंत्री के पद से हटा दिया था। तब यह मामला कई दिनों तक अख़बारों की सुर्खियां बना रहा।  

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