देहरादून : राज्य के अस्तित्व में आने के बाद से उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) द्वारा प्रदेश की जनता के किये गए विश्वासघात और भाजपा के लिए अपना सर्वश्व लगाने के बाद भी पार्टी में कोई तरजीह न मिलने से नाराज़, भाजपा और कांग्रेस  से टिकट न मिलने से मायूस सहित भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय चुनाव लड़ चुके और बहुत ही कम मतों से हारने वाले नेताओं द्वारा दोनों ही राष्ट्रीय राजनितिक दलों के खिलाफ एक साझा मंच तैयार होने को है।  हालाँकि इस मंच की आगवानी भाजपा से तिरस्कारित वे नेता कर रहे हैं  जो इस मंच अथवा मोर्चे को उत्तराखंड में भाजपा का विकल्प बनाने की तैयारी में हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में होने वाले लोक सभा चुनाव और 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस संगठन से नाराज कई कांग्रेसी और भाजपाई  एक बार फिर कई विधानसभा सीटों पर भाजपा के लिए परेशानी पैदा करने की तैयारी में हैं।  इसके लिए पार्टी के बागी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के उत्तराखंड दौरे से पहले एकबार फिर लामबंद होने शुरू हो गए हैं। इनका मानना है कि वे राज्य में भाजपा और कांग्रेस से इतर तीसरे विकल्प के रूप में मजबूत होकर उभरकर चुनावी रणनीति बनाकर जनता को एक मजबूत विकल्प दे सकते हैं। इसी विचार को  लेकर तमाम बागियों की बीते दिन सहस्त्रधारा के रिसोर्ट में एक गोपनीय बैठक हुई।

सूत्रों के अनुसार सहस्त्रधारा रोड स्थित रिजॉर्ट में हुई बैठक में दोनों ही राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के खिलाफ मोर्चे अथवा मंच का क्या स्वरूप होगा इस पर गहन मंथन हुआ। इस बैठक में निर्दलीय सहित कई पूर्व विधायक व भाजपा संगठन में अहम जिम्मेदार पदों पर रहे तमाम बाग़ी नेता शामिल हुए। हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि जितने भी लोग इस गुप्त बैठक में शामिल हुए थे उनमें से अधिकाँश को भाजपा पार्टी अनुशासनहीनता के आरोप लगाकर पार्टी से  निकाल चुकी है। लेकिन बावजूद इसके संघ पृष्ठभूमि से जुडे  होने के चलते इन बागियों की आवाजाही लगातार भाजपा मंत्रियों व बड़े संगठन पदाधिकारियों के यहां अभी भी बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार इन सभी नेताओं ने भाजपा सहित अन्य दलों अब  से कोई नाता न रखते हुए नया मोर्चा बनाने पर सहमति जताई है ।वहीँ अन्य दलों के ऐसे नेताओं को भी मोर्चा में लेने पर सहमति बनी जिन्हे उनके दलों में कोई ख़ास तरजीह नहीं मिल पा रही है। 

चर्चा तो यह भी है कि भाजपा सहित अपनी-अपनी पार्टियों  में तरजीह न मिलने से नाखुश ये लोग पहले तो पार्टी में वापसी को लेकर दबाव बनाते रहे लेकिन जब पार्टी से इन्हे भीतर लेने से साफ़ मना कर दिया तो इन्होने अपने राजनीतिक भविष्य को देखते हुए इस नए मंच अथवा मोर्चे की स्थापना करने की रणनीति बनाने में ही अपनी भलाई समझी।

बैठक में विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व प्रदेश महामंत्री महेंद्र प्रताप नेगी सहित रुड़की से पूर्व विधायक सुरेश जैन, आशा नौटियाल, ब्रजमोहन कोटवाल, ओमगोपाल रावत समेत चुनाव लड़े संदीप गुप्ता, महेन्द्र प्रताप सिंह नेगी, प्रमोद नैनवाल, राजकुमार जायसवाल, ज्योति सजवाण, गोविंद अग्रवाल, कविंद्र ईस्टवाल, पीके अग्रवाल, लक्ष्मी अग्रवाल शामिल हुए।