• निलंबित होने के साथ ही  विजिलेंस समेत कई जांचों में फंसे
देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय मिश्रा पर सिर मुंडाते ही ओले पड़ने की कहावत सटीक बैठती है। जिस राज्य शासन को आज तक अपनी उँगलियों पर नचाने वाले और तमाम तिकड़मों से प्रवक्ता से कुल सचिव तक की कुर्सी तक  पहुँचने वाले मिश्रा को रविवार को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया गया है। यहाँ जारी एक आदेश के तहत उन्हें विजिलेंस जांच के साथ ही विभिन्न पदों पर भर्ती, वित्तीय अनियमितता, घोटाले से संबंधित जांचों के चलते निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में मिश्रा को आधा वेतन देय होगा।

गौरतलब हो कि अप्रैल माह में मृत्युंजय मिश्रा को कुलसचिव के पद से हटाकर शासन में ही अटैच कर दिया गया था। इस आदेश को हाईकोर्ट ने शुक्रवार को रद्द कर दिया था। इसके बाद मृत्युंजय मिश्रा शनिवार को विवि में कार्यभार ग्रहण करने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया था,जिससे वे चार्ज नहीं ले पाया था ।

वहीं कोर्ट के आदेश के आने से पहले कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार ने शासन को पत्र भेजकर कहा था कि चूंकि मृत्युंजय मिश्रा के खिलाफ विजिलेंस जांच गतिमान है। उनके कुलसचिव पद पर बने रहने से उनके खिलाफ नियम विरुद्ध नियुक्ति, वित्तीय अनियमितताओं, घोटालों से संबंधित जांच और विजिलेंस जांच प्रभावित हो सकती है। इसी को आधार मानते हुए सचिव शैलेश बगोली ने उन्हें तत्काल निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। 

आदेश के तहत कहा गया है कि निलंबन अवधि में डॉ. मिश्रा को वित्तीय नियम संग्रह के प्रावधानों के तहत जीवन निर्वाह के लिए आधा वेतन दिया जाएगा। यह सभी भुगतान केवल तभी किया जाएगा जबकि डॉ. मिश्रा इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें कि वह किसी अन्य सेवायोजन, व्यापार या व्यवसाय से पैसा नहीं कमा रहे हैं।