दागी विधायक के बागी सुर…..

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अपने तरफ उठने वाली अँगुलियों को भूल गए क्या लाखी राम

आखिर अपना इतिहास भूलकर क्यों मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं पूर्व विधायक

देवभूमि मीडिया ब्यूरो
देहरादून : विधायक जी आपने यह क्या कर दिया पौने चार साल तक निष्कलंक और ईमानदारी से कार्य कर रहे मुख्यमंत्री को आखिर निशाना क्यों बना दिया।  हम बात कर रहे हैं आज पूर्व विधायक लाखी राम जोशी की जो वर्तमान मुख्यमंत्री पर आरोप लगाने से पहले यह भूल गए कि दूसरे पर उंगली उठाने से उनके ही राजनीतिक कैरियर की भी चर्चा जरूर होगी वह चर्चा जिसका खामियाजा वे आज तक भुगत रहे हैं। अब देखना यह है कि भाजपा हाईकमान ऐसे दागी और अपनी ही पार्टी के नेता के खिलाफ बागी  हुए विधायक पर क्या कार्रवाई करता है। 
सोशल मीडिया में एक पत्र वायरल किया गया है जिसमें पूर्व विधायक व मंत्री रहे लाखी राम जोशी ने वर्तमान मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ हाईकमान को एक पत्र लिखा है. वह भी उस व्यक्ति पर जिसके चार साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री रहते हुए एक भी रुपए के भ्रष्टाचार का इल्जाम नहीं लगा (राजनीतिक विद्वेष की भावनाओं से प्रेरित आरोप को छोड़कर) और वह लगभग संगठन के हर चुनाव में न सिर्फ खरे उतरे हैं बल्कि प्रचंड बहुमत से सफलता भी उन्होंने अर्जित की हैविकास के पथ पर बढ़ते राज्य के कदम और जन भावनाओं का सम्मान इस सरकार में देखने को मिला है तो आखिर क्या वजह रही कि पूर्व विधायक अचानक सक्रिय हो गए और किसके कहने पर सक्रियता दिखा रहे हैं ?
आज यह सवाल तैयार रहा है कि जिस पूर्व विधायक ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में व्हिप जारी होने के बाद भी विधान परिषद् के चुनाव में क्रॉस वोटिंग की और उस समय तो यह चर्चा रही कि माननीय विधायक को बहुत मोटा पैसा दिया गया था । आज अचानक वे आज संगठन के हितैषी कैसे हो गए ? इन्हें तो संगठन का शुक्र मनाना चाहिए कि भाजपा संगठन ने उन्हें टेलर से विधायक तक बनाया जबकि बावजूद इसके भाजपा से उन्होंने गद्दारी की। वहीं इतना सब होने के बाद भी भाजपा और उसके नेताओं ने उन्हें आज तक सम्मान स्वरूप ने मंच पर स्थान भी दिया। वहीं इनके छोटे बेटे को बीडीसी का टिकट देकर जितवाया भी, लेकिन क्या करें विधायक जी ठहरे मनोरोग से ग्रस्त। इतना ही नहीं अब चर्चा तो यह भी हो रही है कि पूर्व विधायक व मंत्री जी ने टिहरी जिले के जिला पंचायत चुनाव में रतन सिंह घनसोला के चुनाव के दौरान भी एक महिला प्रत्याशी के नाम से भी रूपये की बन्दर बांट की थी। 
वहीं वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में जब नरेंद्र नगर विधानसभा से उन्हें टिकट दिया गया तो कार्यकर्ताओं की शिकायत थी कि मान्यवर अपनी नई एंबेसडर कार से नीचे ही उतर नहीं रहे थे, इनके इसी घमंड के कारण भारतीय जनता पार्टी की पारंपरिक सीट लगभग 600 वोटों से हारी गई और वहां से कांग्रेस प्रत्याशी सुबोध उनियाल जैसे नेता का उदय हुआ। 
इतना ही नहीं विधायक जी आज भी भाजपा का टिकट पाने के लिए दिल्ली की दौड़ लगाते हैं लेकिन संगठन के विरोध में लिए गए इनके द्वारा निर्णय समय-समय पर पार्टी प्रत्याशी को सिर्फ इसलिए हराया जाना कि वह इनके गुट का नहीं है या फिर जातीय समीकरणों के हिसाब से इनका नहीं है को देखते हुए पार्टी संगठन पूरा हिसाब रखकर तब से अब तक उनका टिकट काटता रहा है। 
चर्चा यह भी है कि वर्तमान मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र रावत जी जब टिहरी जिले के प्रभारी थे तो उन्होंने जिताऊ प्रत्याशियों को टिकट देने की पैरवी की थी जिस कारण पूर्व विधायक उनसे नाराज चल रहे हैं और अब कुछ दिशाहीन और अपना अस्तित्व खो चुके नेताओं के इशारे पर फिर राजनीतिक ड्रामा रच रहे हैं।  जिससे कि मुख्यमंत्री और संगठन को अपने टिकट के चलते ब्लैकमेल किया जा सके। लेकिन यह विधायक जी भूल गए कि जब से दूसरे पर एक उंगली उठाएंगे तो तीन उंगलिया उनके तरफ भी तो होंगी।
पूर्व विधायक के पूर्व में किए गए संगठन विरोधी कार्यो की चर्चा तो ऐसे में जरूर होगी और फिर जब  विधायक जी का राजनीतिक कैरियर तो खत्म हो ही रहा है लेकिन आपके परिवार से जो नई पौध शुरू हो रही है आपके गलत कार्यो के कारण उनका राजनीतिक भविष्य भी चौपट हो जाएगा अब यह निर्णय जनता ने लेना है ऐसे स्वार्थी जिन्हें संगठन ने विधायक बनाया मंत्री बनाया जब उसके नहीं हो सके तो आम जनता के क्या होंगे ?  आज भी इनको जानने वाले कार्यकर्ता और लोग कहते हैं कि पूर्व विधायक जी को कार्यकर्ता और पब्लिक सिर्फ चुनाव के समय याद आती है, सत्ता प्राप्ति होने के बाद यह चंद लोगों से गिर जाते हैं और उन्हीं के काम करते रहे हैं। तो विधायक जी अपने दाग दिए दाग अच्छे नहीं होते और ईमानदार मुख्यमंत्री पर इस तरीके के मनगढ़ंत आरोप केवल राजनीतिक विद्वेष की भावना से ग्रसित होकर मत लगाइए।