नैनीताल : जमरानी बांध के निर्माण को लेकर एक जनहित याचिका हाईकोर्ट नैनीताल में दायर की गयी है । मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट ने इस मामले में दायर जनहित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार भी कर ली गयी है। हाई कोर्ट ने याचिका पर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश  सरकार से मामले में इसके निर्माण पर की जा रही हीलाहवाली पर जवाब मांगा है। दोनों राज्य सरकारों के लिए इस पर जवाब के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है। जमरानी बांध का मामला उत्तराखंड व उप्र के बीच स्थिति साफ नहीं होने से पिछले चार दशक के बाद भी मूर्तरूप नहीं ले सका है।

हल्द्वानी के गौलापार निवासी रविशंकर जोशी ने इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि जमरानी बांध बनाने कि पहल वर्ष 1975 से शुरू हुई थी। इसके सात साल बाद यानि 1982 में बांध निर्माण के प्राथमिक पहल के तहत गौला नदी में बैराज भी बनाया गया। इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी है। जबकि बांध निर्माण के लिए करोड़ों रूपये की मशीनों भी मंगा ली गई थीं जोकि आज तक बेकार पड़ी हैं।

याचिका में कहा गया कि हल्द्वानी शहर व उसके आसपास के क्षेत्र में पेयजल व सिंचाई के लिए इस बांध की आवश्यकता को देखते हुए बांध प्रस्तावित था।इसी बीच संबंधित क्षेत्र में जल की आवश्यकता में कई गुना वृद्धि हो गई है क्योंकि संबंधित क्षेत्र में आबादी में खासी वृद्धि हो चुकी है। राज्य गठन के बाद भी इस मामले में धरातल में काम नहीं हो रहा है। बांध का मामला केवल फाइलों तक सिमट कर रह गया है। संयुक्त खंडपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब पेश करने को कहा है। इसके लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। मामले की सुनवाई भी तीन सप्ताह बाद ही होगी।

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