टिहरी बांध प्रभावितों की समस्याएं आज भी जस की तस

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किशोर उपाध्याय ने किया टिहरी बांध प्रभावितों की मांगों का समर्थन

सूबे के मुखिया त्रिवेंद्र रावत को लिखी चिट्ठी 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
देहरादून । टिहरी के पूर्व विधायक व प्रदेश के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने टिहरी बांध प्रभावितों की माँगो का समर्थन किया है। इस बारे में उन्होंने सूबे के मुखिया त्रिवेंद्र रावत को चिट्ठी लिखी है जिसमें कहा गया है कि करोना की इस महामारी में टिहरी बांध प्रभावितों की स्थिति चिंता जनक हो गयी है। टिहरी झील के दोनों ओर हजारों लोग निवास कर रहे हैं और 2005 से अपने विस्थापन हेतु कई बार आंदोलन कर चुके हैं।
सरकार ने ग्रामीणों को जेल भी भेजा और कई आन्दोलनकारी मुकद्दमे भी झेल रहे हैं। सरकार ने 2015 में लोगों के कुछ भवनों का 60 प्रतिशत भुगतान किया था।भूमि नहीं मिलने के कारण आज भी ग्रामीण उन टूटे भवनों में रहने को मजबूर हैं, जो कभी भी झील में समा सकते हैं।
इस आपदा की घड़ी में ग्रामीण अपने जीवन को कैसे बचायें? वे सरकार व टी.एच.डी.सी. की ओर देख रहे है। ये ग्रामीण राष्ट्र निर्माण के लिए पहले ही अपनी पैतृक भूमि टिहरी बांध निर्माण के लिए दे चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान अभी तक नहीं हुआ है। लोग जैसे-तैसे अपने जीवन को चला रहे थे, लेकिन इस महामारी ने सब तबहा कर दिया है।
बच्चे बाहर अन्य प्रदेशों में रोजगार करके अपने परिवारों को चला रहे थे, वे भी अब बेरोजगार होकर घर आ गए हैं। खेती तो पहले ही गँवा चुके थे। अब इन प्रभावितों के सामने जीवन यापन की समस्या खड़ी हो गयी है। ग्रामीणों की मांग है कि टी.एच.डी.सी. व उत्तराखण्ड सरकार बांध प्रभावितों को रोजगार व आर्थिक सहायता प्रदान करे।
यही स्थिति टिहरी बांध में पर्यटन से जुड़े व्यवसायियों की भी है। नौजवानों ने कर्ज-पात कर वहाँ जल पर्यटन पर पैसा लगाया, तूफान में उनकी नावें और मशीनरी क्षतिग्रस्त हो गयी है।कोरोना के कारण व्यवसाय चैपट पहले ही हो गया था, वे भी भूखमरी की कगार पर हैं।