• पीएम मोदी ने नीति आयोग की बैठक में राज्यों से कहा लक्ष्य है चुनौतीपूर्ण

  • ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ मंत्र को पूरा करने में नीति आयोग को अहम भूमिका

  • भाजपा और तृणमूल के बीच के रण का असर पहली बैठक पर 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नीति आयोग की गवर्निग काउंसिल की बैठक में राज्यों के मुख्यमंत्रियों व केंद्रशासित क्षेत्रों के उप-राज्यपालों और चुनिंदा केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति में कहा कि भारत को अगले पांच साल में पांच लाख करोड़ डालर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है, लेकिन राज्यों के संजीदा प्रयासों से इसे हासिल किया जा सकता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्यों को अपनी क्षमताओं को पहचानते हुए जिला स्तर पर जीडीपी के लक्ष्य ऊपर रखकर इसकी शुरुआत करनी होगी।

इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसी राव और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के अलावा सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। वहीं जम्मू कश्मीर के राज्यपाल ने बैठक में भाग लिया।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार ने आयोग की दिल्ली में 5वीं गवर्निग काउंसिल की बैठक के बाद बताया कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसी राव जर्मनी गए हुए हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की तबियत खराब है और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी बैठक में शामिल नहीं हो सकीं।

पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल के बीच चल रहे राजनीतिक रण का सीधा असर राजधानी दिल्ली में संपन्न हुई नीति आयोग की पहली बैठक में भी देखने को मिला। नई सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुलाई गई नीति आयोग की पहली ही बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नदारद रही।

ममता ने बैठक में आने से यह कहते हुए साफ इंकार कर दिया कि नीति आयोग के पास राज्यों की योजनाओं के समर्थन के लिए वित्तीय अधिकार नहीं हैं, ऐसे में इस तरह की बैठक की कवायद बेकार है। इससे पहले ममता बनर्जी प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भी नहीं पहुंची थी। ममता के अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह तबीयत खराब होने के चलते बैठक से गायब रहे। जबकि तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव सिंचाई योजना के उदघाटन से जुड़ी तैयारियों के चलते नहीं आए।

यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी ने केंद्र से जुड़े किसी कार्यक्रम या फिर योजनाओं से से कन्नी काटी है। आयुष्मान जैसी केंद्रीय योजना अब तक पश्चिम बंगाल में लागू नहीं है। ममता के मुताबिक सरकार ने बिना आकलन और वित्तीय अधिकारों के योजना आयोग की जगह 2015 में नीति आयोग का गठन किया। जिसमें राज्यों की वार्षिक योजनाओं को समर्थन देने संबंधित अधिकारों का अभाव है। ऐसे में बैठक में शामिल होने का औचित्य नहीं है।

फिलहाल ममता की इस दूरी को राजनीतिक ही माना जा रहा है। जिस तरह हर मुद्दे पर वहां तीखी जंग छिड़ी है और यहां तक कि डाक्टरों की हड़ताल को भी वह राजनीतिक मान रही है, उससे साफ है कि वह फिलहाल चुनावी नतीजों को नहीं भूल पाई हैं।

नीति आयोग की गवर्निग काउंसिल की यह पांचवीं बैठक थी। मोदी ने बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र को पूरा करने में नीति आयोग को अहम भूमिका निभानी होगी। उन्होंने गरीबी, बेरोजगारी, सूखा, बाढ़, प्रदूषण, भ्रष्टाचार और हिंसा के विरुद्ध सामूहिक लड़ाई का आह्वान किया।

हाल में संपन्न आम चुनावों को विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक कवायद करार देते हुए पीएम ने कहा कि अब प्रत्येक व्यक्ति को भारत के विकास के लिये कार्य करने का वक्त है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2024 तक भारत को पांच लाख करोड़ डालर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है लेकिन इसके हासिल किया जा सकता है। उन्होंने राज्यों से उनकी क्षमताओं को पहचानने और जिला स्तर पर जीडीपी के लक्ष्य ऊपर रखने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि गवर्निग काउंसिल के इस मंच पर मौजूद सभी सदस्यों का एक साझा लक्ष्य 2022 तक नये भारत का निर्माण करना है। स्वच्छ भारत अभियान और पीएम आवास योजना इस बात के उदाहरण हैं कि केंद्र और राज्य मिलकर क्या हासिल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अल्पावधि और दीर्घकालिक लक्ष्य हासिल करने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी पर फोकस होना चाहिए।

देश के कई राज्यों में सूखे जैसे हालात के मद्देनजर पीएम ने ‘पर ड्रॉप, मोर क्रॉप’ की रणनीति से इस समस्या को नियंत्रित करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है जो पानी के मुद्दे पर समन्वित नीति प्रदान करेगा। राज्यों को भी जल संरक्षण और प्रबंधन की दिशा में विभिन्न प्रयासों को एक जगह जोड़ने का काम करना चाहिए।

उन्होंने जल प्रबंधन और संरक्षण के लिये मॉडल बिल्डिंग बॉयलॉज की तर्ज पर नियम-कानून बनाने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों की जरूरत बताते हुए कहा कि कारपोरेट निवेश को बढ़ाने, लॉजिस्टिक मजबूत बनाने और समुचित मार्केट सपोर्ट प्रदान करने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आय और रोजगार बढ़ाने के लिए निर्यात क्षेत्र महत्वपूर्ण है। राज्यों को निर्यात को बढ़ावा देने पर फोकस करना चाहिए। जिन राज्यों ने अभी तक आयुष्मान भारत योजना

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