• मामले में दारोगा दिनेश नेगी समेत तीन पुलिस कर्मी अभी भी जेल में
देवभूमि मीडिया ब्यूरो
देहरादून । आईजी की कार में लूट के मामले में कांग्रेसी नेता अनुपम शर्मा को जमानत मिल गई है। यह मामला विगत चार अप्रैल को सामने आया था।  मंगलवार को अनुपम शर्मा को जिला जज की अदालत से जमानत मिली। मामले में नामित दारोगा दिनेश नेगी समेत तीन पुलिस कर्मी अभी भी जेल में हैं।
उल्लेखनीय है कि बीती तीन मई को अदालत में अनुपम की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी। लूटकांड के सभी आरोपित 16 अप्रैल से जेल में बंद हैं। दस अप्रैल को डालनवाला कोतवाली में अपहरण, लूट, सरकारी पद के दुरुपयोग व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में जांच एसटीएफ को सुपुर्द कर दी गई। एसटीएफ ने 16 अप्रैल को अनुपम शर्मा समेत तीनों पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया था। 20 अप्रैल को पुलिस ने आईजी की गाड़ी भी सीज कर दी थी।

गौरतलब है कि चार अप्रैल को प्रॉपर्टी डीलर अनुरोध पंवार निवासी कैनाल रोड, बल्लूपुर को कांग्रेसी नेता अनुपम शर्मा ने डब्ल्यूआइसी में एक प्रॉपर्टी से संबधित रकम लेने के लिए बुलाया। वहां उन्हें एक काले रंग का बैग दिया गया, जिसका वजन 10 से 15 किलोग्राम के बीच था।  उन्हें बताया गया कि इसमें मोटी रकम है। अनुरोध ने चुनाव चेकिंग का हवाला देकर बैग लेने से मना कर दिया और रेस्टोरेंट से निकल कर पार्किंग में खड़ी अपनी कार की ओर जाने लगे। तभी डब्ल्यूआइसी का एक कर्मचारी बैग लेकर आया और उनकी कार में रख गया। अनुरोध बैग लेकर वहां से घर के लिए निकले। रास्ते में होटल मधुबन के सामने एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो के चालक ने ओवरटेक कर उन्हें रोक लिया। यह गाड़ी आइजी गढ़वाल के नाम आवंटित थी। स्कॉर्पियो में दारोगा दिनेश नेगी सादी वर्दी में, जबकि मनोज अधिकारी और हिमांशु उपाध्याय सवार थे। 

आरोप है कि चुनाव की चेकिंग के नाम पर अनुरोध की कार की तलाशी ली और उसमें रखा बैग लूट लिया। अनुरोध ने कारण पूछा तो वर्दीधारियों ने बताया कि स्कॉर्पियो में आइजी बैठे हैं और वे वाहनों में ले जाए जा रहे कैश की चेकिंग कर रहे हैं।  वारदात के बाद हिमांशु अनुरोध की कार में बैठकर आइजी की कार के साथ चलने लगा। सर्वे चौक के पास अनुरोध के साथ बैठे पुलिसकर्मी ने कार रोक दी और खुद उतर गया। उसने उन्हें धमकाकर वहां से चुपचाप चले जाने को कहा। अगले दिन अनुरोध ने दून पुलिस से संपर्क किया। नकदी जब्त करने की बात सुन पुलिस हैरान रह गई, क्योंकि किसी भी स्तर पर पुलिस तक यह जानकारी नहीं पहुंची थी। 

जांच शुरू हुई तो सनसनीखेज वारदात की परतें चली गईं। दस अप्रैल को डालनवाला कोतवाली में अपहरण, लूट, सरकारी पद के दुरुपयोग व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। बाद में जांच एसटीएफ को सुपुर्द कर दी गई। एसटीएफ ने 16 अप्रैल को अनुपम शर्मा समेत तीनों पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया। 20 अप्रैल को पुलिस ने आइजी की गाड़ी भी सीज कर दी गयी थी, जिसे बाद में कोर्ट से छुड़वा दिया गया था। 

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