सरकार से बातचीत का दरवाजा प्रस्ताव वापस न होने तक बंद

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

       त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री

लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक चीज है। लेकिन मैं विश्वास दिलाना चाहता हूं कि पंडा समाज, पुरोहित और अन्य लोग जो चार धाम की सेवा करते हैं उनके सारे हित और हकहकूक संरक्षित रखे गए हैं।

देश में सभी बड़े धार्मिक स्थलों में श्राइन बोर्ड हैं। जिस तरह से चारधाम में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, अनुमान है कि 2030 तक इनकी संख्या एक करोड़ तक हो जाएगी।

हमें भविष्य में श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से व्यवस्थाओं, सुविधाओं को योजनाबद्ध करना है। 

 

देहरादून : चारधाम श्राइन बोर्ड की वजह से नाराज चारों धामों के तीर्थ पुरोहितों ने सरकार से बातचीत के दरवाजे बंद कर दिए हैं। उधर, पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने तीर्थ पुरोहितों के विरोध को देखते हुए विरोध की गेंद को मुख्यमंत्री के पाले में सरका दी है ताकि विरोध कर रहे लोगों को मुख्यमंत्री की तरफ यह कहते हुए कर दिया है कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि तीर्थ पुरोहितों से बातचीत हो गई है और इसके बाद ही उन्होंने श्राइन बोर्ड के प्रस्ताव पर सहमति दी थी। 

गौरतलब हो कि बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में श्राइन बोर्ड के प्रस्ताव को सहमति मिलने के बाद से ही चारों धामों के तीर्थ पुरोहित सड़क पर उतर आए हैं । शुक्रवार को देवभूमि तीर्थ पुरोहित महापंचायत की बैठक हुई और इसमें फैसला लिया गया कि श्राइन बोर्ड का फैसला वापस न होने तक सरकार से कोई बातचीत नहीं की जाएगी। वहीं सरकार भी  अपने इस निर्णय से रोलबैक के लिए तैयार नहीं है।

मामले में महापंचायत के महामंत्री हरीश डिमरी ने सरकार पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार विधि आयोग और चार धाम विकास परिषद के जरिए तीर्थ पुरोहितों से चार धाम विकास पर सुझाव ले रही थी लेकिन दूसरी ओर मंत्रिमंडल की बैठक में श्राइन बोर्ड का प्रस्ताव पारित कर रही थी। 

उनका कहना है कि यदि सरकार को श्राइन बोर्ड का ही गठन करना है तो तीर्थ पुरोहितों को विश्वास में लेती। डिमरी के मुताबिक महापंचायत ने आगे की रणनीति तय करने के लिए कोर कमेटी के गठन का फैसला किया है। विधानसभा कूच का फैसला अपनी जगह कायम है।

इधर, पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने अपना बचाव करते हुए विरोध के स्वरों को मुख्यमंत्री की तरफ मोड़ने का प्रयास करते हुए बयान देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि तीर्थ पुरोहितों से बात हो गई है। इसके बाद ही उन्होंने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई थी। वहीं महाराज ने यह भी कहा कि बातचीत के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं लेकिन बातचीत तय प्रक्रिया के तहत ही होगी। तीर्थ पुरोहित प्रमाण के साथ अपनी बातों को शासन में सक्षम अधिकारी के सामने रखें। महाराज के बयानों से स्वतः ही साफ़ झलकता है कि श्राइन बोर्ड का प्रस्ताव मंत्रिमंडल की बैठक में कौन लेकर आया। 

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