तपोवन त्रासदी में खोज के बाद भी नहीं मिल रहे लोगों को किया जाएगा मृत घोषित, केन्द्र की हरी झंडी

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जो व्यक्ति जहां से लापता हुआ उसे वहीं के अभिहित अधिकारी द्वारा जारी किया जाएगा मृत्यु प्रमाण पत्र 

यदि कोई आपत्ति नहीं आई तो तीस दिन बाद जारी किए जाएंगे मृत्यु प्रमाण पत्र 

त्रासदी में लापता 204 लोगों में से अलग-अलग जगह से मानव अंग समेत कुल मिले  70 शव जबकि 134 लोग अभी भी लापता, टनल से अभी तक मिल चुके हैं 16 शव 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
क्या होगी मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया यहां समझिए
तपोवन त्रासदी में लापता हुए लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित कर दी गई है। इस प्रक्रिया के तहत लापता व्यक्ति के उत्तराधिकारी या निकट संबंधी शपथ पत्र के साथ निवास के स्थान पर गुमशुदगी दर्ज कराएंगे। यह रिपोर्ट संबंधित क्षेत्र के पुलिस स्टेशन को भेजी जाएगी जो आपदा की घटना के अभिहित अधिकारी को दी जाएगी। अभिहित अधिकारी इसकी जांच करेंगे। जांच के आधार पर अभिहित अधिकारी मृत्यु के अस्थाई उपधारणा के आदेश जारी करेगा। इसकी सूचना अखबारों में प्रकाशित होगी। तीस दिन तक दावे व आपत्तियां मांगी जाएंगी यदि कोई आपत्ति नहीं आई तो तीस दिन बाद ही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किये जाएंगे । 
देहरादून : तपोवन त्रासदी के दौरान लापता हुए लोगों को मृतक घोषित करने की केंद्र सरकार से राज्य को हरी झंडी तो मिल गयी है लेकिन लापता लोगों के परिजनों को उनके मृत्यु प्रमाण पत्रों को लेकर इंतज़ार करना होगा। राज्य सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि चमोली आपदा में जो व्यक्ति जहां पर लापता हुआ उसे वहीं के अभिहित अधिकारी द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इस संदर्भ में कोई भी अपील जिलाधिकारी से की जा सकती है। 
वहीं प्रदेश सरकार द्वारा लापता लोगों की तीन श्रेणियां बनाकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार चमोली आपदा में लापता लोगों के तीन श्रेणियों में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें पहली श्रेणी आपदा प्रभावित क्षेत्र के स्थायी निवासी, दूसरी श्रेणी प्रदेश के अन्य जिलों के निवासी जो आपदा के समय प्रभावित क्षेत्र में थे। तीसरी श्रेणी में दूसरे राज्यों के पर्यटक या लोग शामिल हैं। 
उप महारजिस्ट्रार जन्म एवं मृत्यु की ओर से इस संदर्भ में नोटिफिकेशन जारी किए जाने के बाद राज्य सरकार ने भी इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं। स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी की ओर से जारी आदेशों के अनुसार सभी जिलाधिकारियों एवं जन्म मृत्यु पंजीकरण अधिकारियों को इस संदर्भ में प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। इसके साथ ही सरकार ने लापता लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए पंजीकरण कराने के लिए अभिहित अधिकारी और दावों व आपत्तियों के निस्तारण के लिए अपीलीय अधिकारियों भी नामित कर दिए हैं। उत्तराखंड के सभी जिलों के परगना मजिस्ट्रेट या उप जिलाधिकारियों को अभिहित अधिकारी जबकि जिलाधिकारियों व अतिरिक्त जिलाधिकारियों को अपीलीय अधिकारी बनाया गया है। 
गौरतलब हो कि सात फ़रवरी को ऋषिगंगा ग्लेशियर में हिमस्खलन से आए सैलाब के कारण चमोली जिले की रैणी गांव के पास से बहने वाले ऋषिगंगा से होते हुए धौलीगंगा में बाढ़ आ गई थी। इससे सैलाब में रैणी के पास बना हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट जहां पूरी  तरह से तबाह हो गया था वहीं तपोवन में NTPC की निर्माणाधीन धौलीगंगा -विष्णुगाड परियोजना बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। इन दोनों ही परियोजनाओं में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग व परियोजनाओं में काम करने वाले लोग लापता हो गए थे। जबकि अभी भी परियोजना की सुरंग में कई लोगों के मलवे में दबे होने की संभावना है जिनकी खोज की जा रही है। प्रदेश सरकार सहित एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के लोग राहत और बचाव कार्यों को लेकर दिनरात एक किये हुए हैं हालांकि अभी तक सुरंग के भीतर से एक भी जीवित नहीं मिला जबकि लेकिन सुरंग के भीतर व बाहर से अभी तक 70 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं। जबकि 134  लोग अब भी लापता हैं।