सुप्रीम कोर्ट का प्रदेश सरकार की रोक लगाने की याचिका पर इनकार

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

हाई कोर्ट ने किया  तत्काल सुनवाई से इन्कार

नैनीताल हाई कोर्ट ने सोमवार को दो बच्चों से अधिक वाले आदेश को जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत पदों पर लागू करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर तत्काल सुनवाई से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि अधिसूचना दो माह पहले जारी हो चुकी है, अब क्यों इस मामले में आज ही सुनवाई की जाए, जबकि ग्राम प्रधानों के मामले में कोर्ट फैसला दे चुकी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रार्थना पत्र दाखिल कर सोमवार को ही मामले में सुनवाई का आग्रह किया गया था।

देहरादून : पंचायत राज संशोधन अधिनियम में दो से अधिक बच्चों वाले मामले को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई विशेष अनुमति याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए सरकार द्वारा इस पर रोक लगाने की याचिका पर इनकार कर दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने मामले में स्थगनादेश नहीं दिया। शीर्ष कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद ग्राम प्रधान, उप प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य के पद पर 25 जुलाई, 2019 से पहले दो से अधिक बच्चे वालों का चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में 25 जुलाई, 2019 को कट ऑफ डेट माना था। इस तिथि के बाद दो से अधिक बच्चे वाले प्रत्याशी अयोग्य माने जाएंगे।

गौरतलब हो कि गुरुवार को हाईकोर्ट ने 25 जुलाई 2019 से पहले दो बच्चों से अधिक वाले ग्राम पंचायत प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के लिए योग्य करार दिया था। इस फैसले के विरुद्ध राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। 

मामले में पंचायत जनाधिकार मंच के प्रदेश संयोजक और पूर्व ब्लॉक प्रमुख जोत सिंह बिष्ट, कोटाबाग के मनोहर लाल, पिंकी देवी समेत 21 लोगों ने हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिका दायर कर सरकार के पंचायत राज एक्ट में किए संशोधन को चुनौती दी थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई। उत्तराखंड सरकार को यहां भी सफलता नहीं मिली। नामांकन प्रक्रिया जारी होने के कारण माननीय न्यायालय ने सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता की लगातार अपील के बाद भी उनके इस मामले में उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने के आग्रह को निरस्त करते हुए सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया।

जोत सिंह बिष्ट की तरफ से नौजवान एवं होनहार अधिवक्ता श्री आयुष नेगी ने हमारा पक्ष रखते हुए कहा कि मा0 उच्च न्यायालय के फैसले से चुनाव प्रक्रिया किसी भी रूप में बाधित नहीं हो रही है, इसलिए इस मामले में उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है।

हम माननीय उच्चतम न्यायालय का आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने न्याय के हक में फैसला देते हुए इस मामले की सुनवाई जारी रखनी का निर्देश दिया। माननीय उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से उत्तराखंड में पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक 2 से अधिक बच्चों के माता-पिता को चुनाव में भागीदारी का मौका मिला है।

उन्होंने कहा मेरा ऐसे सभी साथियों से आग्रह है कि माननीय न्यायालय में यह लड़ाई जारी रहेगी आप लोग उत्साह पूर्वक कल तक अपना नामांकन पूरा करने के बाद 25 से 27 सितंबर के बीच नामांकन पत्रों की जांच में चौकस रहें। क्योंकि सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि आप लोग चुनाव में भागीदारी न कर सके।

उन्होंने उच्चतम न्यायालय में हमारी तरफ से पैरवी करने हेतु श्री आयुष नेगी का भी धन्यवाद ज्ञापित करता हूं की उच्च न्यायालय में उनके पिता श्री विजय बहादुर सिंह नेगी एवं उच्चतम न्यायालय में बेटे श्री आयुष नेगी ने पंचायत के हितों की रक्षा का मोर्चा बखूबी संभाला।

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