ओजोन सुरक्षित तो हर ज़ोन सुरक्षित : स्वामी चिदानन्द सरस्वती 

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विश्व ओजोन दिवस

ओजोन है पृथ्वी का सुरक्षा कवच

ओजोन सुरक्षित तो जीवन सुरक्षित

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
ऋषिकेश । आज विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने युवा पीढ़ी को संदेश देते हुये कहा कि ओजोन पृथ्वी का सुरक्षा कवच है। ओजोन सुरक्षित है तो पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित है। मानवीय गतिविधियों के कारण विगत कुछ वर्षो से ओजोन परत को नुकसान हो रहा है जिससे पृथ्वी पर तापमान में वृद्धि हो रही है जिसके परिणामस्वरूप ग्लेशियर सामान्य से अधिक मात्रा में पिघल रहे हैं। एक ओर भारत सहित विश्व के अधिकांश देश जल की समस्याओं से जूझ रहे है। अगर पृथ्वी का तापमान इसी वेग से बढ़ते रहा तो जल की कमी के साथ इसका विपरीत असर प्राणियों और वनस्पतियों पर भी पड़ेगा।
ओजोन परत के क्षरण की वजह से सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणें पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकती हैं और यह पेड़-पौधों तथा जीव-जंतुओं के लिये हानिकारक भी होती हैं। मानव शरीर में इन किरणों की वजह से त्वचा का कैंसर, श्वास रोग, अल्सर, मोतियाबिंद जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं। साथ ही ये किरणें मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी प्रभावित करती हैं।
स्वामी जी ने कहा कि प्रकृति का अपना एक सुव्यवस्थित चक्र है, परन्तु मानवीय गतिविधियों के कारण यह चक्र प्रभावित होता है। जिसका परिणाम हमारे सामने आपदाओं के रूप में आता है। प्रकृति के असंतुलन की जो समस्यायें हम देख रहे हैं उसका कहीं न कहीं सम्बंध अवैज्ञानिक विकास और प्रकृति विरोधी मानवीय गतिविधियों से है। स्वामी जी ने कहा कि ये समस्यायें मानव निर्मित है तो समाधान भी मानव के पास ही है। हम सभी जो दैनिक जीवन में प्लास्टिक, क्लोरो-फ्लोरो कार्बन और अन्य प्रकृति विरोधी तत्वों का उपयोग कर रहे हैं उसे धीरे-धीरे कम करना होगा। वातावरण में व्याप्त नाइट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जब तेज धूप के साथ प्रतिक्रिया करते हैं तो ओजोन प्रदूषक कणों का निर्माण होता है। वाहनों और फैक्टरियों से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड व अन्य गैसों की रासायनिक क्रिया भी ओजोन प्रदूषक कणों का निर्माण करती है।
उन्होंने कहा बढ़ते औद्योगिकरण के साथ ही गाड़ियों और कारखानों से निकलने वाली खतरनाक गैसों के कारण ओजोन परत को भारी नुकसान हो रहा है और इसकी वजह से ओजोन प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। साथ ही इसका दुष्प्रभाव भी देखने को मिल रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 8 घंटे के औसत में ओजोन प्रदूषक की मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिये।
हमारे वायुमंडल में ओजोन परत का बहुत महत्त्व है क्योंकि यह सूर्य से आने वाले अल्ट्रा-वॉयलेट रेडिएशन यानी पराबैंगनी विकिरण को सोख लेती है। लेकिन इन किरणों का पृथ्वी तक पहुँचने का मतलब है अनेक तरह की खतरनाक और जानलेवा बीमारियों का होना। इसके अलावा यह पेड़-पौधों और जीवों को भी भारी नुकसान पहुँचाती है। पराबैंगनी विकिरण मनुष्य, जीव जंतुओं और वनस्पतियों के लिये अत्यंत हानिकारक है। स्वामी जी ने कहा कि हमें यूज एंड थ्रो की संस्कृति से यूज ग्रो की संस्कृति को अपनाना होगा। साथ अवैज्ञानिक विकास की जगह सतत विकास पर ध्यान केन्द्रित करना होगा तभी हम भावी पीढ़ियों के लिये इस ग्रह को सुरक्षित रख सकते हैं।
स्वामी जी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन काल में जितनी ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है वह लगभग 24 से 26 पेड़ों के द्वारा प्राप्त होती है इसलिये हम सभी का नैतिक कर्तव्य है कि हम जितना उपयोग कर रहे हैं कम से कम उतने पेड़ तो इस धरती पर रोपित और पोषित करके जायें। आईये आज संकल्प ले कि एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगायेंगे तथा पेड़ लगे रहें इसका भी ध्यान रखेंगे।