निर्विवाद या विवादित कैसे नेता को भेजा जाएगा राज्य सभा !

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राज्यसभा की एक सीट के चुनाव के लिए दिग्गजों ने की जोर आजमाईश शुरू

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र की गुड बुक में शामिल नेता को ही भेजा जाएगा राज्य सभा !

देवभूमि मीडिया ब्यूरो

भाजपा में पार्लियामेंट्री बोर्ड ही उम्मीदवार के नाम पर करता है विचार

राज्यसभा उम्मीदवार चयन के लिए भाजपा में पार्लियामेंट्री बोर्ड होता है, उसमें ही उम्मीदवार के नाम पर हर तरह से विचार किया जाता है। यह अधिकार भी पार्लियामेंट्री बोर्ड को है कि वे किसे उम्मीदवार बनाना चाहता है। बोर्ड जो भी तय करेगा वही पार्टी का उम्मीदवार होगा।  
 मुख्यमंत्री, त्रिवेंद्र रावत
देहरादून । उत्तराखंड कोटे से कांग्रेस के मौजूदा राज्यसभा सांसद राज बब्बर का कार्यकाल 25 नवम्बर 2020 में पूरा हो रहा है। ऐसे में निर्वाचन आयोग ने इस राज्यसभा सीट पर चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है। साथ ही आगामी 20 अक्टूबर को चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी होगी। वहीं, नौ नवंबर को इस सीट पर मतदान होना है। जिसको लेकर भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने भी राज्यसभा की कुर्सी तक पहुँचने के लिए जोर आजमाईश शुरू कर दी है। उत्तराखंड के हिस्से में राज्यसभा की कुल तीन सीटें हैं। इनमें से फिलहाल दो कांग्रेस और एक बीजेपी के पास है।
कांग्रेस से अभिनेता राज बब्बर और प्रदीप टम्टा राज्यसभा के सांसद हैं, जबकि बीजेपी से पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी को राज्यसभा भेजा गया। दरअसल, 2015 में कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य मनोरमा डोबरियाल शर्मा के निधन के कारण खाली हुई सीट से राज बब्बर राज्यसभा पहुंचे थे। मनोरमा डोबरियाल शर्मा नवंबर 2014 में राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुई थी। वहीं, आगामी 25 नवम्बर को राज्यसभा सांसद राज बब्बर का कार्यकाल खत्म हो रहा है। राज्य गठन के बाद से अभी तक केंद्रीय राजनीति के कई बड़े चेहरों को उत्तराखंड से राज्य सदस्य बनने का अवसर मिला है। इनमें केंद्रीय मंत्री रहीं स्व. सुषमा स्वराज, वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, तरुण विजय, मनोहर कांत ध्यानी, कांग्रेस के दिग्गज कैप्टेन सतीश शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, सत्य व्रत चतुर्वेदी, महेंद्र सिंह माहरा के नाम शामिल हैं। इनके अलावा कांग्रेस से राज बब्बर और प्रदीप टम्टा सहित बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी वर्तमान में उत्तराखंड का राज्य सभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
उत्तराखंड राज्य में पिछले दो लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में पांचों लोकसभा की सीटों पर परचम फहराने के साथ ही साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 70 में से 57 सीटों पर काबिज होकर इतिहास रचा है। वहीं, बीजेपी अगले महीने खाली हो रही राज्यसभा की सीट को जीतने की उपलब्धि को अपने खाते में जोड़ने जा रही है, क्योंकि खाली होने जा रही इस राज्यसभा सीट पर बीजेपी की जीत तय है। जिसकी मुख्य वजह है राज्य विधानसभा का गणित। यही वजह है कि भाजपा के कई दिग्गज नेताओं की नजरें इस सीट पर टिकी हुई हैं। राज्य में आगामी नवंबर में खाली होने जा रही राज्यसभा सीट को लेकर दो दिगज्ज नेताओं के नाम चर्चाओं में हैं। पहला पूर्व सीएम विजय बहुगुणा और दूसरा प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू का लिया जा रहा है। हालांकि भाजपा राजबब्बर के राज्यसभा के लिए चुने जाने से लेकर अभी तक एक बार भी उत्तराखंड का रुख न किये जाने से जनता में उनके प्रति उपजे विरोध से बी सबक लेने जा रही है और भाजपा अब ज्यादातर स्थानीय नेताओं को ही राज्यसभा भेजने की पक्षधर है।
सूत्रों की मानें तो इस बार भी भाजपा ने इसी रणनीति पर काम किया तो पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की लॉटरी लग सकती है। क्योंकि भाजपा का विजय बहुगुणा से कांग्रेस छोड़ भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के दौरान का कमिटमेन्ट भी है की वह उन्हें राज्य सभा भेजेगी। वहीं, भाजपा सूत्रों की मानें तो बीजेपी के   पूर्व उपाध्यक्ष श्याम जाजू और अनिल गोयल भी भाजपा के भीतर प्रबल दावेदार हैं। लेकिन उत्तराखंडवासियों की भावनाओं के साथ न तो श्याम जाजू ही भाजपा के लिए फिट बैठते हैं और न अनिल गोयल ही वहीं भाजपा एक बार पहले अजय टम्टा के राज्यसभा में भेजे जाने के दौरान अनिल गोयल पर दांव खेल चुकी है और भाजपा को अपनी एक सशक्त महिला नेता गीता ठाकुर को उनकी नाराज़गी के कारण गंवाना पड़ा है। वहीं श्याम जाजू की जहां तक बात है वे भी उत्तराखंड में प्रभारी रहने के दौरान यहां की सरिताओं में डुबकी लगाने के चलते खासे विवादित हो चुके हैं। इस सब समीकरणों को देखते हुए अब माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की गुड बुक वाले नेता को ही राज्य सभा भेजा जाएगा।