आला अधिकारियों की नीयत पर सवाल व  उंगलियां उठने लगी!

श्री राम कन्सल्टैन्ट प्रा. लि. करेगी लोनिवि के कार्यों की जांच

अधिकारियों को अपने प्रदेश की निर्माण एजेंसी या विभाग पर नहीं रहा भरोसा 

 देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : लोकनिर्माण विभाग की प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को परखने को लेकर कई प्रयोगशालाओं के होने के बावजूद निजी कम्पनी को जांच का जिम्मा दिए जाने से सूबे के आला अधिकारियों की नीयत पर सवाल और उंगलियां उठने लगी हैं। वहीं निजी कम्पनी को जांच का जिम्मा दिए जाने पर सत्ता के गलियारों में यह भी सवाल उठने लगे हैं  कि शासन में बैठे अधिकारियों को अपने प्रदेश की निर्माण एजेंसी या विभाग पर भरोसा नहीं रह गया है या अधिकारियों ने निजी कम्पनी के साथ कोई सांठ -गांठ की है। 

वहीं लोक निर्माण विभाग के सूत्रों का कहना है कि सरकार के इस निर्णय से जहां भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा वहीं लोनिवि के अभियंताओं पर दबाव भी रहेगा कि से निजी कम्पनी को कैसे संतुष्ट करें और  भ्रष्टाचार के दल-दल में फंसते चले जायेंगे। 

शासन द्वारा जारी आदेश पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री ओम प्रकाश ने बताया कि शासन स्तर पर सम्यक विचारोपरान्त निर्णय लिया गया है कि लोक निर्माण विभाग में राज्य सेक्टर के अन्तर्गत स्वीकृत (नाबार्ड से वित्त पोषित योजनाओं सहित) रू. 5.00 करोड़ से अधिक लागत के कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन श्री राम कन्सल्टैन्ट प्रा. लि. से कराया जायेगा। यह निर्णय ऐसे समय पर आया है जब प्रदेश के अधिकाँश जिलों और मंडलस्तर पर लोकनिर्माण विभाग की कई प्रयोगशालाएं पहले से कार्यरत हैं।  

उन्होंने बताया कि यह मूल्यांकन दो चरण में किया जायेगा। जिसमें प्रथम चरण में योजना का 50 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने तथा द्वितीय चरण में योजना का 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने पर मूल्यांकन किया जायेगा।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि लोक निर्माण विभाग में राज्य सेक्टर के अन्तर्गत स्वीकृत (नाबार्ड से वित्त पोषित योजनाओं सहित) रू. 5.00 करोड़ से अधिक लागत के कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन श्री राम कन्सल्टैन्ट प्रा. लि. से कराये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित किये जाने के लिए उनके द्वारा प्रमुख अभियन्ता लोक निर्माण विभाग, उत्तराखण्ड देहरादून को पत्र प्रेषित कर दिया गया है।

अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के अन्तर्गत सड़क निर्माण, पुल निर्माण एवं भवन निर्माण आदि के कार्य कराये जाते हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य बनने के बाद प्रथम बार राज्य सेक्टर के अन्तर्गत स्वीकृत (नाबार्ड से वित्त पोषित योजनाओं सहित) रू 5.00 करोड़ से अधिक लागत के कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन श्री राम कन्सल्टैन्ट प्रा0 लि. से कराया जायेगा। 

उन्होंने बताया कि विभागीय जाँच तो अधीक्षण अभियन्ता/मुख्य अभियन्ता से करायी जाती ही है। उन्होंने कहा कि यदि श्री राम कन्सल्टैन्ट प्रा. लि. द्वारा जाँचोपरान्त रिपोर्ट मिलने पर विभागीय जाँच करने वाले अधिकारियों की जाँच में पारदर्शिता नहीं मिलेगी तो उनके विरूद्ध भी कार्यवाही शासन स्तर पर की जायेगी।

लोक निमार्ण विभाग के टेक्निकल एड़वाईजर आर.पी.भट्ट ने बताया कि वर्ष 2014 से लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियन्ता एवं मुख्य अभियन्ता द्वारा जो कार्य उनको शासन/एच.ओ.डी. कार्यालय से आवंटित होते थे उनकी गुणवत्ता की जाँच उनके द्वारा की जाती थी।

उन्होंने बताया कि सामान्य रूप से एक मुख्य अभियन्ता को 04 कार्यों की जाँच तथा अधीक्षण अभियन्ता को भी 04 कार्यों की जाँच करने का आदेश शासन द्वारा जारी किया गया था, जो 03 प्रकार की श्रेणी की होती थी। प्रथम दृष्टतया संतोषजनक, द्वितीय कार्य में सुधार की आवश्यकता तथा तृतीय श्रेणी अधोमानक कार्य की है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में शासन स्तर से कुछ जाँचें उच्चाधिकारियों से करायी गयी तो पाया गया कि कुछ कार्यों की गुणवत्ता अधोमानक पायी गयी जब कि विभाग की तरफ से ऐसा कोई उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि ऐसे अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी।

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