तो अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के उठाने ही होंगे फ़ोन कॉल

जनप्रतिनिधियों की सुनने के लिए अब सप्ताह में दो दिन सीएम से लेकर डीएम तक रहेंगे अपने दफ्तर में मौजूद

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मुख्यमंत्री ने विधायकों से ऐसे अधिकारियों के नाम देने को कहा जो उनके फोन नहीं उठाते

अब सूबे के सभी जिलाधिकारी हर बुधवार को आधे दिन और गुरुवार को पूरे दिन अपने कार्यालयों में बैठेंगे

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून: अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों में ताल-मेल न होने का मामला जब ”मंथन” में उठा तो मुख्यमंत्री ने नई व्यवस्था दे दी।  इसके तहत अब सूबे के सभी जिलाधिकारी हर बुधवार को आधे दिन और गुरुवार को पूरे दिन अपने कार्यालयों में बैठेंगे इतना ही नहीं मुख्यमंत्री सहित  मंत्री, सचिव समेत अन्य अधिकारी भी अनिवार्यतः अपने कार्यालय में बैठेंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की इस पहल का साफ़ मकसद यह कि जनप्रतिनिधि उनसे मुलाकात कर समस्याओं का निस्तारण कर सकें।

गौरतलब हो कि आगामी 18 मार्च को प्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने जा रहे हैं लेकिन इन तीन सालों में आये दिन अधिकारियों और विधायकों या ने जनप्रतिनिधियों का जनहित के कार्यों के लिए सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध अभी तक नहीं बन पाए। लगातार शिकायतें रहती रही हैं कि कभी अफसर विधायकों के फोन नहीं उठाते तो कार्यालय पहुंचने के बावजूद भी उनसे मुलाकात नहीं हो पाती है।

”मंथन” के दौरान विधायकों ने जब यह मसला मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने उठाया तो उन्होंने इसके लिए नई व्यवस्था बना दी। नई व्यवस्था के अनुसार हर बुधवार को आधे दिन और गुरुवार को पूरे दिन मुख्यमंत्री, मंत्री, सचिव व जिलों में जिलाधिकारी समेत अन्य अधिकारी अपने कार्यालय में बैठेंगे। ताकि जनप्रतिनिधि उनसे मुलाकात कर समस्याओं का निस्तारण कर सकें।

मामला मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में चर्चा के दौरान तब उठा जब कई  विधायकों ने मुख्यमंत्री के सामने अफसरशाही द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन न उठाने और उनके प्रस्तावों पर सुस्त रफ्तार से काम करने तक का आरोप लगाया। इस पर मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को तुरंत निर्देश दिए कि वे विधायकों के नंबर अपने पास सेव रखें और विधायकों के फोन तत्काल उठाएं। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री अधिकारियों के इस व्यवहार से खिन्न नज़र आये और उन्होंने उन्होंने विधायकों से ऐसे अधिकारियों के नाम उन्हें देने को कहा जो उनके फोन नहीं उठाते हैं।