14 व 15 जुलाई को सूबे की 12 ग्राम पंचायतों कार्यकाल समाप्त 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून। प्रदेश के हरिद्वार जनपद से इतर 12 जिलों की 7491 ग्राम पंचायतें 14 व 15 जुलाई को प्रशासकों के हवाले हो जाएंगे। इस सिलसिले में प्रदेश शासन ने अधिसूचना जारी कर दी है । इसी माह की 14 व 15 जुलाई को ही प्रदेश की 12 ग्राम पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल खत्म हो रहा है। 

राज्य में हरिद्वार को सभी जिलों में जून 2014 में ग्राम पंचायतों के चुनाव हुए थे। ग्राम पंचायतों की पहली बैठकें 14 व 15 जुलाई 2014 को आयोजित की गई थीं। पंचायती राज एक्ट के प्रावधान के अनुसार प्रथम बैठक से ही पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल शुरू माना जाता है। उनका कार्यकाल अब 14 व 15 जुलाई को खत्म हो रहा है।

नियमानुसार कार्यकाल खत्म होने से पहले यदि चुनाव नहीं हो पाते हैं तो छह माह की अवधि के लिए ग्राम पंचायतों को प्रशासकों के हवाले किया जाता है। इस सबके मद्देनजर शासन ने मंगलवार को ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी। इसके लिए संबंधित जिलाधिकारियों को प्राधिकृत किया गया है। ग्राम पंचायत का कार्यकाल खत्म होते ही प्रशासक तुरंत कार्यभार ग्रहण कर लेंगे। 

बता दें कि वर्तमान में राज्य में ग्राम पंचायतों की संख्या 7797 है। इनमें से हरिद्वार जिले की 306 ग्राम पंचायतों को छोड़कर बाकी 12 जिलों की 7491 ग्राम पंचायतें प्रशासकों के हवाले होंगी। 

 क्षेत्र व जिपं का अगस्त में खत्म होगा कार्यकाल 

हरिद्वार को छोड़ बाकी जिलों में क्षेत्र पंचायतों व जिला पंचायतों का कार्यकाल प्रथम बैठक के क्रम में क्रमश: नौ अगस्त व 12 अगस्त को खत्म होना है। अपर निदेशक पंचायतीराज मनोज तिवारी के अनुसार क्षेत्र व जिपं में इसके बाद प्रशासकों की नियुक्ति होगी। 

चुनाव सितंबर-अक्टूबर में हैं संभावित 

राज्य के 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायतों (ग्राम, क्षेत्र व जिला) के चुनाव सितंबर आखिर अथवा अक्टूबर पहले पखवाड़े में हो सकते हैं। चुनाव के मद्देनजर ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियों का कार्य 12 जुलाई तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद त्रिस्तरीय पंचायतों में अध्यक्ष व वार्ड सदस्यों का आरक्षण तय किया जाना है। 

सूत्रों की मानें तो इसके लिए भी तैयारी पूरी है। ऐसे में माना जा रहा कि सरकार सितंबर अथवा अक्टूबर पहले पखवाड़े तक पंचायत चुनाव करा लेगी। हालांकि, इस बारे में फैसला राज्य निर्वाचन आयोग को लेना है।

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