राष्ट्रीय नेतृत्व की कसौटी पर खरे नहीं उतर पा रहे थे रामलाल 

चेले को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने को लेकर थे चर्चाओं में लाल 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

विजयवाड़ा / नई दिल्ली : भाजपा के चर्चित महासचिव (संगठन) रामलाल को 13 वर्षों तक भाजपा में रखने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में वापस ले लिया हैं। संघ में उन्हें उनकी पिछले कार्यकाल का ही पद अखिल भारतीय सहसंपर्क प्रमुख  दिया गया है।  इसका साफ़ अर्थ है कि आरएसएस भाजपा में उनकी कार्यप्रणाली से खुश नहीं था।। उनके स्थान पर राष्ट्रीय संगठन महामत्री का दायित्व वी.एल. संतोष  को दिया जा रहा है।

वहीं सूत्रों  का यह भी कहना है कि भाजपा अब उत्तरभारत की जगह दक्षिण भारत में संगठनात्मकतौर पर अपने पैर फैलाना चाहती है इसलिए भी वी.एल. संतोष को राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बनाया गया है।  उनकी दक्षिण भारत के राज्यों में संघ कार्यकाल में बहुत ही अच्छी पकड़ है।  

गौरतलब हो कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह द्वारा भाजपा को फर्श से अर्श तक पहुँचाने के लिए की गयी मेहनत सबके सामने है कि दो सीटों से आज भाजपा साढ़े तीन सौ सीटें पार कर चुकी है। ऐसे में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ पदाधिकारियों की दरकार रहती है जो शीर्ष नेतृत्व के आँख के इशारे को समझते हुए बिना लाग-लपेट के संगठन को आगे बढ़ाये। भाजपा राष्ट्रीय संगठन में चर्चाएं आम थी कि रामलाल की कसौटी पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं या उतरना नहीं चाहते हैं। 

सूत्रों ने उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए बताया कि रामलाम जी ने वहां बिना जनाधार वाले व्यक्ति नरेश अंसल को लोकसभा चुनाव के दौरान कार्यकारी अध्यक्ष बना डाला था जबकि समूचे देश में लगभग राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित नौ प्रदेश अध्यक्ष चुनाव मैदान में थे लेकिन पार्टी ने किसी भी प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी नहीं बांटी तो आखिर उत्तराखंड में ही यह प्रयोग क्यों किया गया। वहीँ इसके बाद उत्तराखंड में चुनाव के दौरान बनाये गए कार्यकारी अध्यक्ष के कृत्यों से सारा संगठन तब सन्न हो गया जब उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अजय भट्ट की नाम पट्टिका बाहर फिंकवाने सहित अब तक के अध्यक्षों की नाम पट्टिका में अपना नाम कुर्सी में बैठते ही अंकित करवा डाला इससे उत्तराखंड में पार्टी की काफी छिछालेदारी हुई थी। इतना ही नहीं उत्तराखंड में यौनशोषण मामले में चर्चाओं में आये प्रदेश संगठनमहामन्त्री संजय कुमार मामले में भी उनपर आरोप है कि उन्होंने उसे बचाने के लिए जमकर अपने पद का दुरपयोग किया।

इसके अलावा रामलाल के साथ कई अन्य विवाद भी चर्चाओं में जुड़े इसलिए उन्हें भाजपा से वापस भेजते हुए संघ में अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख का पद दिया गया है। इस पद पर वह पहले भी रह चुके हैं। उनकी वापसी का फैसला संघ की ‘विजयवाड़ा बैठक’ में लिया गया। शनिवार को विजयवाड़ा में यह बैठक संपन्न हुई है जिसमें देशभर के 1500 से अधिक स्वयंसेवक पदाधिकारियों ने प्रतिभाग किया ।

वहीं नयी दिल्ली में संघ के प्रचार प्रभारी अरुण कुमार ने हमारे संवाददाता को जानकारी देते हुए बताया कि भाजपा में महासचिव (संगठन) के पद पर हमेशा से संघ का पदाधिकारी ही रहा है। दोनों संगठनों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के लिए यह पद संघ के पदाधिकारी को दिया जाता है। अरुण कुमार ने कहा कि संघ के पूर्णकालिकों के स्थानांतरण की यह नियमित प्रक्रिया है। सूत्रों ने कहा कि वी. सतीश भाजपा में रामलाल की जगह ले सकते हैं।

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