सीएम की सीट पहाड़ से दूर करने के भाजपा में छल प्रपंच हुए शुरू

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून :  संघ भी हैरत में है कि जिन स्वयंसेवकों को बीजेपी में संगठन मजबूती के लिये भेजता है, उनके सारे खर्चे बीजेपी उठाती है उन्हें संगठन मंत्री कहा जाता है। ये संगठन मंत्री प्रवास करते है और नेतृत्व खड़ा करते है। यहाँ उत्तराखण्ड में उल्टा है यहाँ राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री शिव प्रकाश और राज्य संगठन मंत्री संजय खुद ही नेतृत्व लपकने को आतुर हैं यही अब संघ की चिंता का विषय है।

एक्जिट पोल से बीजेपी कार्यकर्ता भले ही बल्लियों उछल रहे हों मगर बड़े नेताओं को सांप सूंघ गया है। उत्तराखण्ड में मुरादाबादी दाल का पतीला चढ़ने वाला है। भाजपा को सीटें भले ही पहाड़ से ज्यादा मिल रही हों मगर सीएम की सीट पहाड़ से दूर करने के छल प्रपंच भी शुरू हो गए हैं। जिनकी जिम्मेदारी उत्तराखण्ड बीजेपी को गति देने की  थी, गुटबाजी खत्म करने की थी और कार्यकर्ताओं को जोड़ने  की थी उन्हीं के द्वारा आज उत्तराखण्ड भाजपा खण्ड खण्ड की जा रही है।

बीजेपी के केंद्रीय नेता शिव प्रकाश सिंह जो मूल रूप से ठाकुरद्वारा जिला मुरादाबाद उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, जिनकी जिम्मेदारी भाजपा को बढ़ाना है जब से उनको उत्तराखंड का प्रभार दिया गया है वे तब से पार्टी की सोच से इतर और उत्तरखंड की भावनाओं को रौंदते हुए खुद मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। इस योजना में बड़े मियां शिवप्रकाश की मुहिम को छोटे मियां संजय कुमार गुप्ता आगे बढ़ा रहे हैं क्योंकि संजय का मूल रूप से  जिला भी मुरादाबाद है। दोनों आरएसएस से बीजेपी में आये है, जिनका काम बीजेपी के नेतृत्व को खड़ा करना था वे खुद को मुख्यमंत्री बनाने की जुगत में हैं। उत्तराखण्ड ही ऐसा इकलौता राज्य है जहाँ कमजोर नेतृत्व और आपसी गुटबाजी के कारण प्रदेश से बाहर के लोग मौज काट रहे हैं।

यही कारण है कि कुछ माह पूर्व  रुड़की में सम्पन्न हुई बीजेपी की कार्यसमिति में शिवप्रकाश और संजय की दादागिरी से आजिज आकर भगत सिंह कोश्यारी ने सीधे शिव प्रकाश पर तीखा हमला बोला था, साथ ही शिवप्रकाश के तीन चहेतों संजय, अजय भट्ट और अजय टम्टा को भी निशाने पर लिया। उन्होंने इन तीनों को शिव का त्रिशूल बताया। कोश्यारी के इस हमले ने भाजपा में दून से दिल्ली तक भूचाल ला दिया था । भाजपा के भीतर उस समय यह मान लिया गया कि भगदा की बात और उनका भाषण उत्तराखंड भाजपा हर दुखी और कुंठित कार्यकर्त्ता की आवाज था। शिवप्रकाश के सामने ये हिम्मत कोश्यारी ही दिखा सकते थे। चर्चा तो यह भी है कि इस घटना के बाद कोश्यारी गुट के अजय भट्ट अपने गुरु कोश्यारी को छोड़  शिवप्रकाश के साथ खड़े हो गये।

भाजपा के देहरादून से लेकर दिल्ली तक के नेताओं में आजकल कानाफूसी चल रही  है  कि शिवप्रकाश बीजेपी उत्तराखण्ड को अपने ही तरीके से हाँक रहे है।वहीँ यह चर्चाएं भी भाजपा में आम है कि  डॉ.निशंक व जनरल खण्डूड़ी शिवप्रकाश से प्रत्यक्ष लड़ाई में बचते रहे हैं, वे शिवप्रकाश से पंगा लेने का अर्थ संघ की नाराजगी के रूप में समझते हैं। और वे यह भी समझते हैं कि शिव प्रकाश की लाबिंग लम्बे समय से चल रही है, जिससे अब सभी भाजपाई  भी अवगत हैं।

कुल मिलाकर उत्तराखंड भाजपा में अभी से सत्ता संघर्ष चुनाव परिणामों के एक्सिट पोल के आने के बाद से तेज़ हो गया है, इस संघर्ष में जहाँ उत्तरप्रदेश के ये दोनों नेता अपनी गोटियां बैठाने में जुट गए हैं इन नेताओं ने पार्टी आलाकमान को यह फीडबैक तक दे दिया है कि जब हरियाणा मूल के स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी को पार्टी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा सकती है तो हम तो उत्तराखंड के पूर्व प्रदेश उत्तरप्रदेश से ही तो हैं लेकिन वे यह फीड बाइक नहीं दे रहे कि स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी की कर्मभूमि उत्तराखंड ही रही और उनकी गिनती उत्तराखंड के एक मात्र सरल, ईमानदार और सम्मानित मुख्यमंत्री के तौर पर होती है।

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