• सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने  व्यक्त किया गहरा दुःख 
  • प्रदेश में घोषित हुआ तीन दिन का राजकीय शोक 
  • ऐसी शख्सियत जिन्हे दो-दो राज्य का मुख्यमंत्री होने का हुआ गौरव प्राप्त 
  • आज ही था पंडित नारायण दत्त तिवारी का जन्म दिवस 
  • देश के ऐसे नेताओं हुए शुमार जिनकी जयंती और पुण्य तिथि एक ही दिन
  • राजनीति में जो शून्य उभरा है उसकी भरपाई नहीं हो पाएगी : बलूनी 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : नेहरू-गांधी के दौर के चंद दुर्लभ नेताओं में शुमार और आजादी की लड़ाई में सक्रिय योगदान देने वाले देश और प्रदेश की राजनीती में एक लम्बे समय तक महत्वपूर्ण पदों पर रहने वाले उत्तराखंड के विकास पुरुष के नाम से विख्यात पंडित नारायण दत्त तिवारी ने 93वर्ष की आयु में गुरुवार को दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में आखिरी सांस ली। पंडित नारायण दत्त तिवारी के निधन से राजनीति पार्टियों में शोक की लहर है। वहीं पंडित जी के जन्म और मृत्यु की एक ही तारीख होने के साथ एक बात तय हो गयी कि तिवारी जी देश के गिनती के ऐसे नेताओ में शुमार हो गए जिनकी जयंती और पुण्य तिथि एक ही दिन मानेगी। 

उनकी मृत्यु पर प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि हमने राजनीति के पुरोधा को खो दिया है जिसका हमें गम सालता रहेगा। उन्होने उनके परिजनों को इस दुःख को सहने कि शक्ति की कामना की है। उन्होंने अपने शोक संदेश में मुंख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि ‘‘उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पं.नारायण दत्त तिवारी जी के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करता हूं। ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति व परिजनों को दुःख सहने की प्रार्थना करता हूं। तिवारी जी का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है, विरोधी दल में होने के बावजूद उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर रहकर सदैव अपना स्नेह बनाये रखा। श्री तिवारी के जाने से भारत की राजनीति में जो शून्य उभरा है, उसकी भरपाई कर पाना मुश्किल है। तिवारी जी देश के वित्त मंत्री, उद्योग मंत्री और विदेशमंत्री जैसी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उत्तराखंड श्री तिवारी जी के योगदान को कभी नहीं भुला पाएगा, नवोदित राज्य उत्तराखंड को आर्थिक और औद्योगिक विकास की रफ्तार से अपने पैरों पर खड़ा करने में तिवारी जी ने अहम भूमिका निभाई।’

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और राज्यसभा सांसद श्री अनिल बलूनी प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री नारायण दत्त तिवारी जी के निधन पर गहन शोक प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि तिवारी जी के निधन से प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति में जो शून्य उभरा है उसकी भरपाई नहीं हो पाएगी। स्वर्गीय तिवारी ने देश के स्वाधीनता संग्राम से लेकर देश की राजनीति और लोकतंत्र को पुष्ट करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

वहीं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत , डॉ. रमेश पोखरियाल ”निशंक” भगत सिंह कोश्यारी सहित विजय बहुगुणा सहित उनके पूर्व ओएसडी संजय जोशी आदि ने भी उनकी मृत्यु पर दुःख व्यक्त किया है। 

पंडित नारायण दत्त तिवारी देश के पहले ऐसे राजनीतिज्ञ थे, जिन्हें दो-दो राज्य का मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त हुआ। पंडित नारायण दत्त तिवारी केंद्र में वित्त, विदेश, उद्योग, श्रम सरीखे अहम मंत्रालयों की कमान संभाल चुके थे। कांग्रेस आलाकमान ने जब उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य की कमान सौंपी गई तो उत्तराखंड की आंदोलनकारी शक्तियां और यहां के नेता असहज और स्तब्ध थे। कि उनके जैसे विराट राजनैतिक कद वाले नेता को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाये जाने के निहितार्थ निकाले जाने लगे थे।

मुख्यमंत्री बनने के बाद पंडित नारायण दत्त तिवारी ने अपने केंद्रीय रिश्तों के दम पर निवेशकों को उत्तराखंड आने को विवश किया। राजमार्गों और सर्किल मार्गों को रिकार्ड समय में तैयार कराया। नये राज्य की तरक्की उनके विजन से ही उनके उत्तराधिकारी आगे की राह तैयार करते आए हैं। वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता एनडी तिवारी का विवादों से भी नाता रहा। वह चाहे हैदराबाद में राज्यपाल के तौर पर कार्यकाल, उनके जैविक पुत्र का मामला हो या फिर अपने बनाए ही मेडिकल कालेज के गेट पर धरना देना हो।

अपने शासनकाल में उन्होंने लाल बत्ती जमकर लुटाई। जिसकी खूब चर्चा हुई थी ,इसके पीछे उनकी कुर्सी बचाने की चाहत भी कही जाती रही। इसे लेकर लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी का एक चर्चित लोकगीत ”नौ छमी नारायण” भी सामने आया था। जिसके बाद से उनका राजनीतिक पतन शुरू हो गया था और कांग्रेस को तमाम सिकास कराया करने के बावजूद भाजपा सत्ता सौंपनी पड़ी थी।  इस दौरान भाजपा ने खंडूरी को सूबे का मुख्यमंत्री बनाया था।  इस हार के बाद  कांग्रेस आलाकमान ने उनको आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाया।  वहीं हैदराबाद में अपनों के षड्यंत्रों के चलते सुर्ख़ियों में आने के बाद उन्हें वहां के राज्यपाल के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद भी विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और उन्हें जैविक पुत्र के मामले में कोर्ट तक पहुंचा। जिसके बाद वर्ष 2014 में नारायण दत्त तिवारी ने रोहित शेखर तिवारी को अपना बेटा माना।

सपा से नजदीकी और भाजपा को समर्थन दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात आदि -आदि घटनाओं को लेकर वे हमेशा चर्चा में रहे।

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