लालढांग-चिलरखाल रोड को नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड ने शर्ताें के साथ दी मंजूरी

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एनटीसीए के अनुरूप होगा वन भूमि में सड़क का निर्माण 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

PWD बनाएगा डबल लेन की यह सड़क : डॉ. रावत 

डॉ.रावत ने बताया कि अब इस सड़क का निर्माण कार्य 15-20 दिन में शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए एनटीसीए से भी इजाजत ली जाएगी।

फिलहाल विभाग ही इसे बनाएगा। सड़क निर्माण को भूमि हस्तांतरण, फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोनिवि को कार्यदायी एजेंसी बनाया जाएगा। ये प्रक्रिया इस सड़क को डबल लेन बनाने को होगी।

देहरादून: उत्तराखंड सरकार की महत्वकांक्षी और गढ़वाल और कुमायूं को जोड़ने वाली लालढांग-चिलरखाल मोटर मार्ग के निर्माण को नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड ने कुछ शर्ताें के साथ इस सड़क के निर्माण को मंजूरी दे दी है। वहीं अब इस सड़क का निर्माण नेशनल टाइगर कंजर्वेशन आथोरिटी (एनटीसीए) की गाइडलाइन के अनुरूप होगा। सूबे के वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत के अनुसार अब 15-20 दिन के भीतर एक बार फिर निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

गौरतलब हो कि प्रदेश में भाजपा की सरकार ने सत्तारूढ़ होते ही गढ़वाल एवं कुमाऊं मंडलों को राज्य के भीतर ही सीधे आपस में जोड़ने वाली कंडी रोड (रामनगर-कालागढ़-चिलरखाल- लालढांग) का निर्माण राज्य सरकार की प्राथमिकता में रखा था। लेकिन तमाम झंझटों के बाद बीते कुछ महीने पूर्व इस सड़क का कार्य रुक गया था। 

हालांकि प्रदेश सरकार ने इस मार्ग के गैरविवादित हिस्से लालढांग-चिलरखाल के निर्माण का कार्य शुरू भी कर दिया था और वन भूमि हस्तांतरण कर लोनिवि को निर्माण का जिम्मा सौंपा गया था। छह किमी सड़क तैयार होने के और तीन पुलों का निर्माण के बाद अधिकारियों की आपसी खींचातान के चलते यह मामला एनजीटी में पहुंच गया था।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की इंपावर्ड कमेटी ने निर्माण कार्य का निरीक्षण कर कोर्ट को अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी । इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण कार्य पर रोक लगाने के साथ ही इसके लिए नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड और एनटीसीए से अनुमति लेकर निर्माण के निर्देश दिए थे जिसके बाद से ही निर्माणाधीन इस मार्ग के भविष्य पर भी सवाल उठने शुरू हो गए थे और निर्माण कार्य ठप्प हो गया।

तमाम औपचारिकताओं को पूर्ण करने के बाद राज्य सरकार ने यह मसला राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में रखा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे अनुमोदन के लिए नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड को भेज दिया गया। मंगलवार को दिल्ली में हुई नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड की बैठक में यह मसला रखा गया। दिल्ली में मौजूद वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने बताया कि बोर्ड ने इस सड़क का एनटीसीए की गाइडलाइन के अनुसार निर्माण कराने को मंजूरी दे दी है।

डॉ. रावत के अनुसार नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड ने सूबे की तीन अन्य सड़कों को भी मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि लालढांग-चिलरखाल के अलावा राजाजी टाइगर रिजर्व से लगी नौड़खाल-कोटा माला रोड, बिनसर सेंचुरी के अंतर्गत गैराड-दिव्या मोटर मार्ग और गोविन्द पशु विहार में नैटवाड-कलाप मार्ग को भी मंजूरी मिली है।