राष्ट्रीय आरोग्य मेला- 2020 : बुधवार से परेड ग्राउन्ड में

उत्तराखण्ड की धरती आयुर्वेद के जनक चरक ऋषि की धरती

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प्रदेश के राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं निजी कालेज भी करेंगे प्रतिभाग

मेले में आएंगे देश भर से प्राचीन चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञ 

चरक संहिता के बिना आयुर्वद की कल्पना नहीं की जा सकती

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून। राष्ट्रीय आरोग्य मेला- 2020 के आयोजन के सम्बन्ध में आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने सचिवालय स्थित मीडिया सेन्टर में बताया कि 12 फरवरी से 16 फरवरी, 2020 तक परेड ग्राउन्ड में आयुष मेले का आयोजन किया जा रहा है।

पांच दिवसीय इस मेले में आयुर्वेद, होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति पर आयुष मंत्रालय और प्रदेश सरकार की ओर से स्टॉल लगाए जाएंगे। मेले में प्रदेश के राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं निजी कालेज भी प्रतिभाग करेंगे। मेले में देश भर से प्राचीन चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञ आएंगे। इन विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आम जनता को स्वस्थ रहने और बीमारियों के उपचार से सम्बन्धित परामर्श देंगे। मेले में प्राचीन चिकित्सा पद्धति को उपयोग में लाये जाने तथा जन सामान्य तक इसका लाभ पहुंचाने पर भी चर्चा की जायेगी।

आयुष मंत्री डॉ हरक सिंह रावत ने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय आयुष मेले का आयोजन किया जाता है, इस वर्ष आयुष मेले की मेजबानी का मौका उत्तराखण्ड को मिला है। उत्तराखण्ड की धरती आयुर्वेद के जनक चरक ऋषि की धरती है, चरक संहिता के बिना आयुर्वद की कल्पना नहीं की जा सकती है। प्राचीन ग्रन्थों में हिमालयी क्षेत्र को जड़ी बूटियों के क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है। उत्तराखण्ड जड़ी-बूटी एवं गंगा यमुना का प्रदेश है।

उन्होंने कहा कि जड़ी बूटी के प्रदेश में आरोग्य मेले का आयोजन प्राचीन चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाने में निश्चित रूप से मददगार होगा। इस अवसर पर सचिव आयुष दिलीप जावलकर एवं आरोग्य मेला- 2020 के को पार्टनर पी.एच.डी चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अधिकारी आदि भी उपस्थित थे।