प्रेरक प्रसंग : आमदखोर जानवर को भी अपने बचाव का भरपूर अवसर देने के प्रबल पक्षधर थे जिम कॉर्बेट

0
334

जिम कॉर्बेट का मानना था कि आदमखोर जानवर को भी बचाव का उचित अवसर मिलना चाहिए

इस बात का उल्लेख उन्होंने अपनी किताब “कुमाऊँ के नरभक्षी” में किया

प्रयाग पाण्डे 
एडवर्ड जेम्स कॉर्बेट यानी जिम कॉर्बेट बेहतरीन शिकारी ही नहीं बल्कि उच्चकोटि के आदर्शवादी सज्जन इंसान भी थे। जिम कॉर्बेट ने दर्जनों आदमखोर बाघ,तेंदुए और शेरों को उनके अंतिम अंजाम तक पहुँचाया। लेकिन वे आमदखोर जानवर को भी अपने बचाव का भरपूर अवसर देने के प्रबल पक्षधर थे। जिम कॉर्बेट के इस उच्च स्तरीय आदर्शवादिता को एक वाकये से बखूबी जाना और समझा जा सकता है।
जब जिम कॉर्बेट मोहन के खूंखार नरभक्षी शेर को मारने के लिए घने जंगल में अकेले उसका पीछा कर रहे थे, एकाएक एक संकरी और गहरी खाई में जिम कॉर्बेट और नरभक्षी शेर का प्रत्यक्ष आमना-सामना हो गया। शेर, चारे के रूप में लगाए गए कटड़े को खा कर संकरी खाई में टूटे वृक्ष के तने के नीचे आराम फरमा रहा था। नरभक्षी को खोजते हुए जिम उसके बेहद करीब पहुँच गए। नरभक्षी शेर के मुँह और जिम के बीच सिर्फ पाँच फिट का फासला था,शेर नींद में था। जिम ने नरभक्षी शेर के माथे पर दनादन दो गोलियां उतार दीं। शेर वहीं पर ढेर हो गया।
हालांकि जिम कॉर्बेट इस नरभक्षी को मारने के निमित्त महीनों से दिन -रात जंगलों की खाक छान रहे थे। उनका काम पूरा हो गया था। इस वाकये के वक्त वहाँ जिम और नरभक्षी के अलावा कोई और चश्मदीद नहीं था। शेर को मारने के बाद जिम शेर की लाश के पास ही गिरे हुए पेड़ के तने पर बैठ गए,सिगरेट सुलगाई और सोचने लगे कि उन्होंने नरभक्षी शेर को मारने का यह काम ठीक ईमानदारी से नहीं किया। जिम कॉर्बेट सोते हुए शेर को मार गिराने को नैतिक रूप से उचित ठहराने के लिए मन ही मन अनेक तर्क गढ़ने लगे।
उन्होंने खुद को तसल्ली देने के लिए तर्क दिया कि शेर नरभक्षी था,जिसका जीवित रहने से मर जाना बेहतर था, इसलिए इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि जब उसे मारा गया वह जागा हुआ था या सोया हुआ और यदि उसे छोड़ दिया जाता तो उन सभी मानवों की संभावित मृत्यु के लिए, जिन्हें वह उसके बाद मारता,उसके लिए नैतिक रूप से वे (जिम) ही जिम्मेदार होते। जिम कॉर्बेट का मानना था कि सोये हुए शेर को मारने के लिए इन बलवान तर्कों के बावजूद यह खेद फिर भी बचा रह जाता है कि उन्होंने सोते हुए जानवर को जगाया और उसे अपने बचाव के लिए खिलाड़ी जैसा मौका नहीं दिया। जिम कॉर्बेट का मानना था कि आदमखोर जानवर को भी बचाव का उचित अवसर मिलना चाहिए। जिम ने इस घटना पर अफसोस जताते हुए खुद इसका उल्लेख अपनी किताब ““मैन ईटर्स ऑफ़ कुमाऊं” में किया है।