यूपी निर्दलीय विधायकअमनमणि को पास जारी करने वालों को बनाएं पक्षकार : हाईकोर्ट

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वरिष्ठ अधिवक्ता और समाज सेवी आलोक घिल्डियाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर की मामले की सीबीआई जांच की मांग 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
नैनीताल : लॉकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के नौतनवा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी और उनके साथियों को बदरी-केदार जाने के लिए पास जारी करने के मामले में विधायक अमन मणि त्रिपाठी सहित अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही है। हाई कोर्ट ने पास जारी करने वालों को पक्षकार बनाये जाने के निर्देश देते हुए अगली तारीख एक सप्ताह बाद मुकर्रर की है। 
देहरादून निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता और समाज सेवी आलोक घिल्डियाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की है। 
जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पितृ कार्य के बहाने बदरीनाथ-केदारनाथ जाने के लिए पास जारी करने वालों को मामले में पक्षकार बनाने के निर्देश याचिकाकर्ता को दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई हुई।  हालांकि सरकार की ओर से याचिका को खारिज होने योग्य करार देते हुए सरकारी वकीलों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में विधायक व उनके साथियों के खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है। यह केस सीबीआई को सौंपे जाने योग्य नहीं है।दिल्ली उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव जोशी ने याचिकाकर्ता वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक घिल्डियाल की और से जिरह में भाग लिया। 
गौरतलब हो कि विधायक को साथियों सहित चमोली जिले के कर्णप्रयाग प्रखंड के अंतर्गत गौचर में ही चमोली जिले की सीमा में प्रवेश करने से पहले ही लौटा दिया गया था। मामले में अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश द्वारा जिलाधिकारी को निर्देश देते हुए अपर जिलाधिकारी रामजी शरण द्वारा पास जारी कर दिया गया था। जिसका सोशल मीडिया सहित समाचार पत्रों और चैनलों में खूब चर्चा हुई थी कि लॉक डाउन के दौरान ऐसे एक विधायक और उसके सदाथियों को ऐसे में जब बदरीनाथ के कपाट अभी खुले ही नहीं हैं और केदारनाथ तक जाने की किसी को भी अनुमति नहीं है, पर खूब बबाल मचा था। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर पास जारी करने वाले सभी अधिकारियों को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं।