ऐतिहासिक होता है माता मूर्ति मेला 

 भगवान नर-नारायण और उनकी मां मूर्ति का मिलन

माता मूर्ति मेले का यह है कार्यक्रम

मंगलवार प्रातः 9.30 बजे भगवान बदरीनारायण को दोपहर का राजभोग लगाकर उनके बालसखा उद्धव जी को गर्भगृह से बाहर लाया जाएगा। इसके बाद सुबह 10 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी के सानिध्य में बदरीनाथ मंदिर से उद्धव जी की शोभायात्र नाग-नागिन, गजकोटी, इंद्रधारा होते हुए तीन किमी पैदल चलकर माणा पहुंचेगी।

यहां पर रावल माता मूर्ति मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। यहां भी भगवान को दोपहर का राजभोग लगेगा। इस राजभोग को माणा गांव के हक-हकूकधारियों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। यहां पर सेना, आइटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) सहित स्वयं सेवी संस्थाओं के भंडारे लगेंगे। जबकि, स्थानीय लोगों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद दोपहर दो बजे उद्धव जी की डोली बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेगी। डोली के मंदिर पहुंचने पर अपराह्न तीन बजे मंदिर के कपाट खोले दिए जाएंगे।

जोशीमठ : भगवान नारायण को भी अपनी मां मूर्ति से मिलने के लिए भाद्रपद शुक्ल द्वादशी यानी वामन द्वादशी का इंतजार करना पड़ता है। इस तिथि पर जब भगवान नर-नारायण और उनकी मां मूर्ति का मिलन होता है तो स्थानीय लोग इस मिलन को यादगार बनाने के लिए माता मूर्ति मेले का आयोजन करते हैं। इस बार वामन द्वादशी मंगलवार को पड़ रही है।

प्रत्येक वर्ष वामन द्वादशी पर बदरीनाथ धाम से तीन किमी दूर देश के अंतिम गांव माणा के माता मूर्ति मंदिर में भव्य मेले का आयोजन होता है। इस मौके पर स्वयं भगवान नारायण अपनी माता से मिलने के लिए माता मूíत मंदिर पहुंचते हैं। मान्यता है कि सहस्नबाहु का अंत करने के लिए भगवान विष्णु ने नर-नारायण के रूप में अवतार लिया। युद्ध के दौरान माता मूर्ति ने उनसे मिलने की इच्छा जताई। तब भगवान नारायण ने माता मूíत को वचन दिया कि वह स्वयं उनसे मिलने आएंगे। कहते हैं कि इसी वचन को निभाने के लिए भगवान हर साल वामन द्वादशी के मौके पर अपनी मां मूíत से मिलने के लिए माणा जाते हैं। मां-बेटे के मिलन के इस उत्सव का साक्षी बनने इस दिन हजारों लोग माणा पहुंचते हैं।

Advertisements

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.