ग्रामीणों ने अब खुद ट्रस्ट बनाकर इस स्थल को संवारने का लिया है निर्णय 

ग्रामीणों ने शासन, प्रशासन व पर्यटन विभाग द्वारा गुजड़ूगढ़ी की उपेक्षा पर जताई नाराजगी 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

पौड़ी । उत्तराखंड के बावन गढ़ों में प्रसिद्ध गढ़ गुजड़ूगढ़ी उपेक्षा का दंश झेल रहा है। शासन, प्रशासन व पर्यटन विभाग द्वारा गढ़ी का समुचित विकास न करने, पर्यटन मानचित्र पर लाने की कोशिश न करने, गढ़ी में आवश्यक सुविधाएं मुहैया न कराने आदि उपेक्षा से स्थानीय ग्रामीणों व प्रवासी बन्धुओं में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने अब खुद ट्रस्ट बनाकर इस स्थल को संवारने का निर्णय लिया है। मंगलवार को आयोजित बैठक में स्थानीय समाजसेवी एवं गढ़ जन शक्ति संगठन के सदस्य जगमोहन जिज्ञासु व ग्रामीणों ने शासन, प्रशासन व पर्यटन विभाग द्वारा गुजड़ूगढ़ी की उपेक्षा करने पर नाराजगी जताई गई।

 बैठक में निर्णय लिया गया कि गुजड़ूगढ़ी के विकास के लिए एक ट्रस्ट बनाया जाएगा जो निर्माण कार्य व व्यवस्था संचालन की देखरेख करेगा। विकास तथा पुनर्निर्माण के लिए धन की व्यवस्था करके ट्रस्ट गुजड़ूगढ़ी को प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करेगा।

जगमोहन जिज्ञासु ने बताया कि गुजड़ूगढी के विकास के लिए पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, क्षेत्रीय विधायक दिलीप रावत से कई बार अपील की चुकी हैं लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं हो पाया। बताया कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी ज्ञापन भेजा गया। इससे पहले पूर्व सीएम हरीश रावत को भी ज्ञापन दिया गया था लेकिन कोई भी सरकार या कोई भी नेता गुजड़ूगढ़ी के लिए कुछ विशेष नहीं कर सका। गढ़ जन शक्ति संगठन द्वारा साल में एक बार गुजडूगढ़ी में भगवती जागरण का आयोजन किया जाता है।

बैठक में राम सिंह, अजय सिंह, संजय सिंह, सुनील पंवार, दरवान सिंह, हरपाल सिंह, संध्या रावत, सुनीता रावत आदि मौजूद रहे। उत्तराखंड के बावन गढ़ों में से प्रसिद्ध गढ़ है गुजड़ूगढ़ीधुमाकोट। उत्तराखंड के बावन गढ़ों में से प्रसिद्ध गढ़ है गुजडूगढ़ी। गुजड़ूगढ़ी के टॉप पर गढ़वाल के राजपरिवार की आराध्या मां भगवती राजराजेश्वरी का प्राचीन मंदिर है। जिसका जीर्णोद्धार किया गया है। मंदिर के निकट पूर्व-दक्षिण दिशा में एक धर्मशाला है। मंदिर के उत्तर की ओर ठीक सामने हिमालय की छटा दर्शनीय है। उत्तर दिशा में ही अनेक गहरी खाइयां कटी हुई हैं। कुछ दूरी पर नीचे की ओर सुरंग है जिसके अंदर सात बावड़ियां हैं। जिनमें से तीन अभी भी दिखाई देती हैं। जहां तक पर्यटक पहुंचते हैं।

लगभग आठ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित गुजड़ूगढ़ी से हिमालय की छटा के साथ सूर्योदय व सूर्यास्त देखने लायक होता है। सर्दियों में बर्फवारी का आनंद लेने के साथ ही गर्मियों में भी बड़ी संख्या में यहां पर्यटक पहुंचते हैं। किनगोड़ीखाल से लगभग 6 किमी की पैदल चढ़ाई के बाद गुजड़ूगढ़ी पहुंचा जा सकता है। रामनगर कार्बेट पार्क से किनगोड़ीखाल की दूरी महज 70 किमी, कोटद्वार से 140 किमी है। गुजड़ूगढ़ी की तलहटी में बसे पर्यटन ग्राम जमणधार से गुजड़ूगढ़ी की पैदल दूरी मात्र दस किमी है।

गुजड़ूगढ़ी गढ़वाल के राजाओं की सीमांत सैनिक चैकी थी। ऐतिहासिक महत्व के महाकाव्य कनक वंश में इसका जिक्र है। इतिहासकार हरिशरण रतूड़ी व डा. शिवप्रसाद डबराल ने अपनी पुस्तकों में गुजड़ूगढ़ी का वर्णन किया है। यह माना जाता है कि गोरखा आक्रमण के समय स्थानीय लोगों ने गुजड़ूगढ़ी सुरंग में छिपकर जान बचाई थी।

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