धर्म संकट में खंडूरी की सियासत और भाजपा !

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  • ”खंडूरी है जरूरी” का नारा क्या अब भाजपा के लिए नहीं है जरूरी
  • अपने पुत्र के प्रचार के लिए मैदान में कैसे नहीं उतरेंगे खंडूरी 
राजेंद्र जोशी
देहरादून  : आपके पसंदीदा न्यूज़ पोर्टल देवभूमि मीडिया  द्वारा यह समाचार ब्रेक किये जाने के बाद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर भाजपा नेता सेवानिवृत मेजर जनरल  खंडूरी के बेटे के कांग्रेस में शामिल होने की खबरें सियासी गलियारों में जोरों से तैर रही हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह है उस भाजपा का तब क्या होगा जिसने बीते विधान सभा चुनाव और लोक सभा चुनावों के दौरान ”खंडूरी है जरूरी ” के नारे लगाकर भाजपा के लिए जनता से वोट मांगे और क्या खंडूरी बदले हालातों में अपने पुत्र के प्रचार के लिए मैदान में नहीं उतरेंगे? जिस मैदान को खंडूरी जी ने भाजपा की फसल उगाने के लिए तैयार किया था। 
वहीँ सबसे  बड़ा सवाल तो यह है जिस ”गढ़वाल लोक सभा सीट से खंडूरी जी के पुत्र मनीष के कांग्रेस से उतरने की संभावनाएं हवाओं में तैर रही है उसी गढ़वाल लोक सभा का यमकेश्वर  विधानसभा क्षेत्र से मनीष खंडूरी की बहन और मेजर जनरल  श्री खंडूरी की पुत्री ऋतू खंडूरी भाजपा से विधायक हैं।  ऐसे में  क्या वे भी भाजपा का साथ न देकर अपने भाई का साथ देंगी।  सवाल बहुत हैं जो हवाओं में तैर रहे हैं लेकिन  वे तब तक हैं जब तक मनीष खंडूरी को कांग्रेस की सदस्यता और गढ़वाल से प्रत्याशी घोषित नहीं कर लेती। 
सूत्रों से खबर है कि  मनीष खंडूरी के कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष  राहुल गाँधी से बहुत ही नजदीकी सम्बन्ध हैं जो  उनके और राहुल के विदेश में हुई किसी मुलाकात के बाद से बने हैं और वर्तमान में संकट से जूझ रही कांग्रेस उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के बेटे मनीष खंडूड़ी को कांग्रेस में शामिल कर उत्तराखंड में  सेवानिवृत मेजर जनरल  खंडूरी द्वारा गढ़वाल लोक सभा सीट पर तैयार की गयी राजनीतिक जमीन अपर अपनी फसल लहलहाने की तैयारी में है। यही कारण है कि बीते दिन से उत्तराखंड की वादियों में सेवानिवृत मेजर जनरल  खंडूरी के पुत्र के कांग्रेस में शामिल होने की ख़बरें फ़िजाओं में ऐसे तैर रही हैं जैसे कांग्रेस कोई बड़ा धमाका करने जा रही है। हालाँकि इस खबर को आपके पसंदीदा न्यूज़ पोर्टल देवभूमि मीडिया ने ही  ब्रेक की थी। 
खबर तो यह भी आ रही है कि सेवानिवृत मेजर जनरल  खंडूरी व पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के बेटे मनीष खंडूड़ी ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। चर्चा यह भी है कि भाजपा ने काफी समय से सेवानिवृत मेजर जनरल  खंडूरी को नेपथ्य में धकेल रखा है। वह भी तब से जब उन्होंने संसद में रक्षा मामलों की स्थायी कमेटी से हटाया गया था। तब से वे भाजपा से नाराज चल रहे थे। एक जानकारी के अनुसार सांसद खंडूड़ी ने पौड़ी लोकसभा से अपनी पुत्री विधायक यमकेश्वर के लिए पौड़ी से टिकट मंगा था। परन्तु पार्टी ने साफ़ मना कर दिया। साथ ही खबर है कि खंडूड़ी की दावेदारी को भी दरकिनार कर दिया है। इसी कारण उनके पुत्र मनीष खंडूड़ी बीजेपी से नाराज चल रहे थे।
चर्चा है कि पेशे से पत्रकार और आईटी जानकार मनीष फेसबुक इंडिया के न्यूज पार्टनरशिप के हेड हैं। उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड, बिजनेस वर्ल्ड सरीखी पत्र-पत्रिकाओं के लिए पत्रकारिता की और सीएनएन के डिजिटल संस्करण से भी जुड़े रहे । इंजीनियर खंडूड़ी ने दिल्ली इंजीनियंरिंग कालेज से इंजीनियंरिंग की उपाधि लेकर, कैलाग से एमबीए की उपाधि प्राप्त की। 10 साल तक टर्नर ब्रदर के साथ काम भी किया। सामाजिक रुप से मनीष जय दुर्गा सामाजिक कल्याण संस्था के हेड के रुप में शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे 16 मार्च को देहरादून के परेड मैदान में कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी  प्रस्तावित रैली में मनीष खंडूरी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। इससे पहले उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और हरक सिंह रावत सहित महारानी माला राज्य लक्ष्मी के कांग्रेस में जाने को लेकर चर्चा जोरों पर थीं। हालाँकि सतपाल महाराज ने तो दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करके अपनी सफाई देते हुए कहा कि मेरे द्वारा बीजेपी छोड़ने की बात में जरा भी सच्चाई नहीं है। इतना ही नहीं उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि मैं भाजपा में हूं और भाजपा में ही रहूंगा और पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में पूरे देश में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव प्रचार करूंगा।उन्होंने कहा  न मैं टिकट मांग रहा हूं, न ही लोकसभा चुनाव लड़ने की मैंने किसी के सामने इच्छा जताई है। यहां तक कि मेरे परिवार से भी कोई लोकसभा टिकट का दावेदार नहीं है। उन्होंने पार्टी या मुख्यमंत्री से अपनी नाराजगी की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।

वहीं डॉ. हरक सिंह रावत का जहाँ तक कांग्रेस में जाने की बात है तो उनके बारे में कहा जाता है कि  वे केंद्रीय नेता राम विलास पासवान से भी बड़े मौसम विज्ञानी हैं जो राजनितिक समीकरणों और फिजाओं  को भली भांति जानने का तजुर्बा रखते हैं लिहाजा वे ऐसे मौसम में जब देश दुनिया में मोदी की लहर चल रही है वे कैसे कांग्रेस का दमन थाम सकते हैं।