125 लोगों को मार चुका था गुलदार 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

रुद्रप्रयाग । ‘ मैन ईटर ऑफ़ रुद्रप्रयाग” दुनिया के एक शिकारी द्वारा लिखी गयी मात्र किताब ही नहीं बल्कि उन 125 लोगों को मार डालने के बाद अपना शिकार बनाने वाले उस नरभक्षी गुलदार की कहानी है जिसकी दहशत से श्रीनगर से लेकर कर्णप्रयाग तक के कस्बों और गांवों के लोग अधेरा होने से पहले अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो जाया करते थे ।लेकिन इस गुलदार की दहशत से मुक्ति लगभग 70 दिनों बाद मुक्ति मिल पायी थी और उस गुलदार का शिकार गुलाबराय में किया गया ।उसके बाद स्थानीय लोगों ने 25 जुलाई 1875 को नैनीताल में जन्मे प्रसिद्ध शिकारी जिम कॉर्बेट की एक प्रतिमा गुलाबराय में उस वृक्ष के नीचे स्थापित की जिसकी टहनियों पर कॉर्बेट ने मचान बनाकर खूनी गुलदार का शिकार किया था । हालांकि कॉर्बेट ने इसी आदमखोर के साथ ही बेंजी के पास एक दूसरा गुलदार भी मार गिराया था।

इसी गुलाबराय को अब जिम कार्बेट के नाम की नई पहचान मिलने वाली है। इसके लिए केंद्र सरकार से जिम कार्बेट म्यूजियम के प्रस्ताव को स्वीकृति मिल चुकी है। करीब एक करोड़ से नगर पालिका रुद्रप्रयाग की ओर से गुलाबराय में म्यूजियम बनाये जाने को हरी झंडी मिल चुकी है। जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग सहित राष्ट्रीय राज मार्ग और लोनिवि, वन विभाग सहित पर्यटन विभाग के अधिकारी इस स्थान का सर्वे कर चुके हैं जिसपर जल्द ही कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

गौरतलब हो कि पूर्व में जिम कार्बेट की याद में गुलाबराय में मात्र स्मारक बनाया गया था, लेकिन वर्ष 2012 में चित्रकार प्रेममोहन डोभाल के हाथों से बनाई गई जिम कार्बेट की मूर्ति को यहां स्थापित की गई। पूर्व में वन एवं पर्यटन विभाग ने जिम कार्बेट स्मारक के सुंदरीकरण एवं संग्राहलय को लेकर कई बार शासन को प्रस्ताव तो भेजा, लेकिन प्रस्तावों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। वर्ष 2018 में कलश साहित्यिक संस्था की ओर से जिम कार्बेट के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग मंगेश घिल्डियाल ने वन एवं पर्यटन विभाग को म्यूजियम का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे।

पर्यटन विभाग ने इसी दौरान डीएम के माध्यम से जिम कार्बेट का म्यूजियम बनाने को लेकर भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा था। लंबी कवायद के बाद भारत सरकार की ओर से जिम कार्बेट के म्यूजियम के लिए स्वीकृति मिल चुकी है।